प्रधानमंत्री देंगे किसानों को लोहड़ी का तोहफा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोहड़ी के मौके पर किसानों की खुशहाली का बड़ा तोहफा देंगे। इससे मकर संक्रांति व पोंगल जैसे त्यौहार पर किसानों की खुशी दोगुनी हो जाएगी। नई फसल बीमा योजना की घोषणा 13 जनवरी को होगी। इसके लिए प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रमुख सचिव पीके मिश्र खुद कृषि मंत्रालय में शनिवार अवकाश के दिन भी बैठकें करते रहे। इसके चलते मंत्रालय के सभी अधिकारी सक्रिय रहे।

नई फसल बीमा योजना को लेकर सरकार पूरी सावधानी बरत रही है, ताकि नई योजना का हश्र भी पिछली योजना जैसा ही न हो जाए। पिछले तीन दशक से चलाई जा रहीं अलग-अलग फसल बीमा योजनाएं केवल 23 फीसद किसानों तक ही पहुंच पाईं। इन योजनाओं में ज्यादातर उन किसानों को ही शामिल किया गया, जिन्होंने बैंकों से कृषि लिया था। इसलिए इसे फसल बीमा की जगह बैंक ऋण बीमा योजना के तौर पर ही जाना गया। प्रस्तावित मसौदे में सभी किसानों को शामिल करने के लिए इसका दायरा बढ़ाया गया है।

सरकार का अनुमान है कि प्रस्तावित नई फसल बीमा योजना में 50 फीसद से अधिक किसान शामिल हो जाएंगे। इसके लिए बीमा प्रीमियम का 95 फीसद से अधिक हिस्सा केंद्र व राज्य सरकारें वहन करेंगी। बीमा योजना की घोषणा के बाद सब्सिडी का बोझ देखकर राज्य सरकारें विरोध जता सकती हैं। किसानों को प्रीमियम के रूप में बीमित राशि का डेढ़ से ढाई फीसद ही देना होगा।

पंजाब में खेती में घाटे के चलते किसान आत्महत्याएं भले ही बढ़ी हों, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बीमा योजनाएं लागू नहीं की गईं। पंजाब व हरियाणा में फसल बीमा की अधिसूचना जारी ही नहीं गई। तुर्रा यह कि 100 फीसद सिंचित होने की वजह से यहां के किसानों को कोई नुकसान नहीं होता है। उत्तर प्रदेश में 11 फीसद किसानों ने इसमें हिस्सा लिया है, जिसमें 99 फीसद कृषि ऋण लेने वाले हैं।

कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई बीमा योजना का सबसे अधिक लाभ बुंदेलखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तरी बिहार, सौराष्ट्र, विदर्भ, मराठवाड़ा और तटीय ओडिशा जैसे जोखिम वाले क्षेत्रों को होगा। नई योजना में कैप जैसे प्रावधान हटा लेने से किसानों को ज्यादा फायदा होगा। दूसरा सबसे बड़ा संशोधन नुकसान के सर्वे को लेकर हुआ है। राजस्व विभाग की सर्वेक्षण रिपोर्ट को सभी बीमा कंपनियों को स्वीकार करना अनिवार्य होगा।

फसल बीमा के बारे में किसानों को जागरूक करना और बीमा करने वालों की कमी सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए बैंकों पर बोझ डालना संभव नहीं होगा। खेती व किसानों के प्रति राज्य सरकारों की प्रतिबद्धता व सक्रियता के बड़े मायने होंगे। देश में छोटे-बड़े 14 करोड़ किसानों को इसके दायरे में लाने में सरकार के पसीने छूट सकते हैं।

 

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