आरआईएल-ओएनजीसी विवाद: शाह समिति की भूमिका खारिज की

नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने ओएनजीसी के साथ केजी गैस विवाद मामले में सरकार की ओर से गठित एक सदस्यीय एपी शाह समिति पर सवाल उठाए हैं। मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी का कहना है कि अनुबंध के अनुसार समिति का कोई कानूनी आधार नहीं है। ऐसे विवादों का निपटान सिर्फ मध्यस्थता के जरिये हो सकता है।

आरआईएल ने समिति की 31 दिसंबर को पहली बैठक पर जस्टिस (सेवानिवृत्त) शाह को इस बाबत एक पत्र भेजा। इसमें कहा कि समिति ओएनजीसी को दी जाने वाली मुआवजे की राशि नहीं तय कर सकती है। इसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के केजी ब्लॉक से समीप के रिलायंस इंडस्ट्रीज फील्ड में कथित गैस प्रवाह को लेकर दिया जाना है।

कंपनी ने शाह समिति के साथ सहयोग नहीं करने का फैसला किया है। पत्र में आरआईएल ने समिति से कहा कि वह यह स्वीकार नहीं करती कि भारत सरकार मामले में कोई समिति गठित कर सकती है या विवाद से जुड़े किसी मामले को निपटा सकती है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी सहयोग कर रही है और चाहती है कि समिति उसके बंगाल की खाड़ी स्थित कृष्णा गोदावरी बेसिन ब्लॉक से रिलायंस इंडस्ट्रीज के केजी-डी6 फील्ड में प्रवाहित प्राकृतिक गैस के लिए मुआवजे और जुर्माने का निर्धारण करे।

 

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