पाक ने नकारे भारत के सुबूत

लाहौर। लगता है कि पठानकोट हमले की साजिश रचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर भारत का दबाव पाकिस्तान पर असर दिखाने लगा है। इस सिलसिले में जैश-ए-मुहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के गृह नगर बहावलपुर से कुछ संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

समाचार चैनल “एआरवाई न्यूज” ने सोमवार को बताया कि भारत द्वारा दिए गए सुरागों के आधार पर खुफिया एजेंसियों ने इन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनको पूछताछ के लिए किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है।

हालांकि, अधिकारियों ने भारत की ओर से दिए गए फोन नंबरों से पल्ला झाड़ लिया है। उनका कहना है कि ये नंबर पाकिस्तान में रजिस्टर्ड नहीं हैं। बताते चलें कि भारत सरकार ने पाकिस्तान को दो नंबर सौंपे थे। इनमें एक नंबर +92-1017775253 आतंकियों के हैंडलर का था। इसके अलावा एक और नंबर +92-3000597212 पर भी आतंकियों की बात हुई थी।

इस बीच, बहावलपुर के क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी अहसान सादिक ने बताया कि उन्हें पठानकोट हमले के सिलसिले में किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। लेकिन खुफिया अफसरों ने इस्लामाबाद में बताया कि गुजरांवाला, झेलम और बहावलपुर में छापा मारकर कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

कितने लोग पकड़े गए हैं, अभी इस बारे में स्पष्ट सूचना नहीं है। एक अधिकारी ने बताया, “हम इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इनमें से कोई हमले से जुड़ा हुआ था? किसी ने अन्य तरीके से हमलावर की मदद तो नहीं की थी?”

“द एक्सप्रेस ट्रिब्यून” में प्रकाशित एक खबर में कहा गया है कि अमेरिका ने भी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पर पठानकोट के हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। इसके बाद ही शरीफ ने संयुक्त जांच दल के गठन का आदेश दिया था।

इसके अलावा भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही विदेश सचिव स्तर की बातचीत संभव है। इससे भी शरीफ प्रशासन पर दबाव बढ़ा। पाक सरकार द्वारा गठित संयुक्त जांच दल में इंटेलीजेंस ब्यूरो, आइएसआइ और मिलिट्री इंटेलीजेंस के खुफिया अधिकारियों को शामिल किया गया है।

एक अन्य प्रमुख अखबार “द न्यूज” का कहना है कि सरकार ने शुरुआती जांच पूरी कर ली है और इसकी रिपोर्ट भारतीय अधिकारियों को सौंप दी गई है।

भारत आतंकी सरगना मसूद अजहर को पठानकोट हमले के लिए जिम्मेदार मानता है। भारत सरकार ने अजहर के भाई राऊफ और पांच अन्य लोगों पर भी इस हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया है। अजहर के मदरसे में छात्रों की संख्या इस समय लगभग सात सौ है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यहां छात्रों को चरमपंथ का पाठ पढ़ाया जाता है। हालांकि, पठानकोट हमले को लेकर यहां कोई छापेमारी नहीं की गई है।

 

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