2,200 रुपए/बैरल: मिनरल वॉटर से भी सस्ता कच्चा तेल

नई दिल्ली/मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की गिरती कीमत और रुपए की विनिमय दर में ठहराव का गहरा असर हुआ है। भारत में फिलहाल कच्चा तेल मिनरल वॉटर से भी सस्ता हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बैरल (159 लीटर) कच्चे तेल की कीमत 33.32 डॉलर हो गई है। वर्ष 2016 में अब तक कच्चे तेल की कीमत 11 प्रतिशत घटकर पिछले 11 साल के निचले स्तर पर आ गई है।

घरेलू बाजार में इसके दाम 2,200 रुपए प्रति बैरल रह गए हैं। यानी कच्चा तेल करीब 13.80 रुपए प्रति लीटर रह गया है, जबकि देश में मिनरल वॉटर की औसत कीमत 20 रुपए प्रति लीटर है।

इसके उलट घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें उतनी नहीं घटाई गईं, क्योंकि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए इन जरूरी ईंधनों पर उत्पाद शुल्कों में लगातार इजाफा करती रही है।

70 के मुकाबले महज 20 फीसदी किया सस्ता

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट का भारतीय ग्राहकों को कोई खास फायदा न हुआ है और न ही होगा। विश्व बाजार में जहां क्रूड की कीमतों में 70 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, वहीं भारत में पेट्रोल केवल 20 प्रतिशत सस्ता हुआ है।

वजह यह है कि सरकार उत्पाद शुल्कों में लगातार इजाफा कर रही है। सरकार ने नवंबर, 2014 से जनवरी, 2015 के बीच पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क चार बार बढ़ाया है। मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान तीसरी बार इस महीने की शुरुआत में उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया।

…तो 10 रुपए और सस्ता होता पेट्रोल

यदि सरकार उत्पाद शुल्क नहीं बढ़ाती तो पेट्रोल की कीमत में 10.02 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 9.97 रुपए प्रति लीटर तक की अतिरिक्त कमी आती।

इसलिए गिर रहा कच्चा तेल

  • अमेरिका ने कच्चे तेल का निर्यात शुरू कर दिया, जबकि अब तक वह कू्रड ऑयल का बड़ा आयातक था।
  • दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन में मंदी के चलते कच्चे तेल की खपत में भारी कमी आई है।
  • ईरान से प्रतिबंध हटने के कारण वहां का कच्चा तेल भी बाजार में आने लगा, जिससे आपूर्ति बढ़ गई।
  • डॉलर में लगातार मजबूती के कारण तमाम कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आ रही है, जिसमें कच्चा तेल भी शामिल है।

यह असर होगा

  • कई देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है, खास तौर पर तेल निर्यातक देशों की।
  • भारत को फायदा होगा क्योंकि यहां जरूरत का ज्यादातर तेल आयात किया जाता है।
  • सरकार का घाटा कम होगा, रुपए में मजबूती आएगी और अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

 

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