पंचवर्षीय योजनाओं का आम बजट में हो सकता है पटाक्षेप

नई दिल्ली। योजना आयोग खत्म होने के बाद नेहरू युग का एक और प्रतीक इतिहास बनने जा रहा है। सरकार पंचवर्षीय योजनाएं बनाने की परंपरा छोड़कर विकास का “राष्ट्रीय एजेंडा” तैयार करने की नई शुरूआत कर सकती है। माना जा रहा है कि आगामी आम बजट में 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए अंतिम बार आवंटन के साथ ही केंद्रीयकृत पंचवर्षीय योजनाओं की मौजूदा व्यवस्था का पटाक्षेप हो सकता है।

सूत्रों ने कहा कि नीति आयोग ने 12वीं पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि समीक्षा की है। इसमें 12वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्यों और उपलब्धियों का आकलन करते हुए अर्थव्यवस्था की ताजा तस्वीर पेश की गई है। फिलहाल आयोग ने यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय के पास भेजी है, वहां से हरी झंडी मिलने के बाद जल्द ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

आगामी आम बजट में 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए अंतिम बार आवंटन किया जाएगा। अब तक हुए विचार विमर्श से तय है कि 13वीं पंचवर्षीय योजना नहीं आएगी। हालांकि, इसकी अधिकारिक घोषणा बजट के अवसर पर की जा सकती है। सूत्रों ने कहा कि पंचवर्षीय योजनाओं की जगह विकास का राष्ट्रीय एजेंडा बनाने की शुरुआत हो सकती है।

नीति आयोग राष्ट्रीय एजेंडा बनाने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को फ्रेमवर्क उपलब्ध कराने का काम करेगा। उल्लेखनीय है कि मार्च 1950 में योजना आयोग की स्थापना के साथ ही देश में पंचवर्षीय योजनाएं बनाने की शुरुआत हुई थी। फिलहाल 12वीं पंचवर्षीय योजना चल रही है जो अप्रैल 2012 में शुरू हुई और मार्च 2017 तक चलेगी। पंचवर्षीय योजनाओं की प्रासंगिकता को लेकर समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

पंद्रहवीं लोकसभा के दौरान वित्त मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति ने भी योजना आयोग को पंचवर्षीय योजनाएं बनाने की परंपरा को छोड़कर 20 से 30 वर्ष की दीर्घकालिक योजनाएं बनाने का सुझाव दिया था। समिति का कहना था कि योजनाएं बनाने की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

इस बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगड़िया ने सोमवार को बैठक कर आम बजट के संबंध में नीति आयोग के मुद्दों को लेकर आयोग के सभी सदस्यों से विचार विमर्श भी किया है। सूत्रों ने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के लिए जो लक्ष्य तय किए थे, उनमें से कई पूरे होने के आसार नहीं हैं।

मसलन 12वीं पंचवर्षीय योजना में 8 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य था लेकिन पहले तीन वर्षों में सालाना विकास दर औसतन मात्र 6.4 प्रतिशत रही है। चालू वित्त वर्ष में भी विकास दर मात्र सात से साढ़े सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, इसलिए पांच वर्ष मिलाकर 8 प्रतिशत सालाना विकास दर का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।

असल में 12वीं पंचवर्षीय योजना का विकास दर का लक्ष्य हासिल न होने की वजह यूपीए के आखिरी दो वर्षों में अर्थव्यवस्था में सुस्ती है। यूपीए के दो अंतिम वर्षों में विकास दर औसतन छह प्रतिशत सालाना रही।

 

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