आम बजट पर राज्यों की फरमाइशें सुनेंगे जेटली

नई दिल्ली। चौदहवें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद आवंटन कम होने संबंधी कई प्रदेशों की शिकायत के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली शनिवार को राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ आम बजट 2016-17 के संबंध में चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में राज्य अपनी शिकायतों के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अधिक धन की मांग भी कर सकते हैं।

वित्त मंत्री प्रस्तावित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन के संबंध में भी इस बैठक में राज्यों के साथ विचार विमर्श कर सकते हैं। साथ ही कई राज्य राज्य अपने जीएसडीपी (राज्य सकल घरेलू उत्पाद) के मुकाबले कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने की मांग भी कर सकते हैं।

वैसे तो हर साल आम बजट से पहले वित्त मंत्री राज्यों के साथ बजट पूर्व चर्चा करते हैं लेकिन इस बार की यह बैठक कई मायनों में खास है। अगले वित्त वर्ष से केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अहम बदलाव होने जा रहा है जिससे राज्यों को अपना आवंटन घटने की आशंका है। वित्त मंत्री के साथ बैठक में राज्य इसी तरह के मुद्दे उठा सकते हैं। इसके अलावा 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो सकती है। बिहार सहित कई राज्य 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद केंद्रीय करों से कम धनराशि मिलने की शिकायत कर चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि चौदहवें वित्त आयोग ने पिछले साल केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत करने की सिफारिश की थी। ऐसे में केंद्र की दलील है कि राज्यों के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं, जिन्हें वे अपनी जरूरत के अनुसार खर्च कर सकते हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार राज्यों से केंद्र प्रायोजित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने का आग्रह भी कर सकती है।

जहां तक जीएसटी का सवाल है तो केंद्र इस मुद्दे पर राज्यों को राजी करने का प्रयास करेगा। जीएसटी के लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक फिलहाल राज्यसभा में लंबित है। कांग्रेस पार्टी इस विधेयक के कुछ प्रावधानों का विरोध कर रही है। वित्त मंत्री ने जीएसटी जल्द ही अमल में आने की उम्मीद जताई है।

राज्यों के साथ बैठक से पहले जेटली कृषि, व्यापार, वित्त और उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व चर्चा कर चुके हैं।

 

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