तेजी से आगे बढ़ेगा सार्वजनिक बैंकों का विलय

नई दिल्ली। यह तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में ही साफ कर दिया था कि सरकारी बैंकों के मौजूदा स्वरूप को अब ज्यादा दिनों तक नहीं बरकरार रखा जाएगा। आज ज्ञान संगम में उन्होंने संभावित बदलाव की रूपरेखा भी खींच दी। छोटे-छोटे सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े बैंक बनाने की प्रक्रिया अगले एक से दो वर्षों के भीतर शुरू हो सकती है।

इस पर आगे का रोडमैप बनाने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा। समिति की सिफारिशों पर बैंक बोर्ड ब्यूरो यह फैसला करेगा कि किन-किन बैंकों को आपस में मिलाया जाए। यह प्रक्रिया पूरी होगी तो मौजूदा दो दर्जन से ज्यादा सरकारी बैंकों की जगह पर कुछ गिने-चुने बैंक होंगे लेकिन इनका आकार काफी बड़ा होगा।

ज्ञान संगम सरकारी बैंकों की दशा व दिशा पर विचार विमर्श करने के लिए दो दिवसीय आयोजन था। आज इसका समापन हुआ, जिसे वित्त मंत्री ने संबोधित किया। बाद में उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंककर्मियों को बैंकों के शेयर (ईसॉप यानि इम्प्लॉईज स्टॉक ऑप्शन) भी देने पर विचार कर रही है। इसके अलावा आठ लाख करोड़ रुपये के फंसे कर्ज की समस्या से निपटने को सरकार सरफेसी कानून और ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) को मजबूत बनाने की दिशा में भी कदम उठाएगी। इस बैठक में एनपीए यानी फंसे कर्जे का मुद्दा खासतौर पर उठा। बैंकों की तरफ से कई तरह के सुझाव भी आए।

जेटली ने कहा कि बैठक में शामिल बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने बैंकिंग क्षेत्र में विलय के मुद्दे पर विचार के लिए एक समिति बनाने का सुझाव दिया। हम इस सुझाव पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में बैंकों से ज्यादा मजबूत बैंकों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ज्ञान संगम में बैंकिंग क्षेत्र में विलय के विचार का समर्थन किया गया। बैठक में दूसरा सुझाव कर्मचारियों को बैंकों के स्टॉक देने के लिए इम्प्लॉईज स्टॉक ऑप्शन प्लान के बारे में भी आया। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार इस बारे में विचार कर रही है। इस बारे में लंबे समय से मांग की जा रही है। इस पर सक्रियता से विचार किया जा रहा है।

बैंकों के फंसे कर्ज के बारे में जेटली ने कहा कि संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाने के अलावा सरकार क्षेत्र विशेष के संबंध में भी फैसले ले रही है। बिजली, राजमार्ग, चीनी और इस्पात उद्योग में समस्याएं दूर करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। जेटली ने कहा कि बैठक में सरफेसी कानून में संशोधन करने और डीआरटी प्रक्रिया को मजबूत बनाने का सुझाव भी आया। वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग इस संबंध में काम कर रहा है। डीआरटी देश के पहले ऑनलाइन कोर्ट बनेंगे।

 

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