बाघों की सुरक्षित बसाहट के लिए रातापानी बनेगा ‘वाइल्ड डिवीजन’

भोपाल। रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने के बजाए राज्य सरकार इसे कूनो पालपुर की तर्ज पर ‘वाइल्ड डिवीजन’ बनाने जा रही है। ताकि बाघों के संरक्षण को लेकर लगातार पड़ रहे दबावों से भी बचा जा सके और निर्माण कार्यों पर रोक न लगाने का सरकार का उद्देश्य भी पूरा हो सके। वन विभाग ने यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।

फिलहाल रातापानी में 59 बाघ, 100 तेंदुए और 150 से ज्यादा भालू हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रस्ताव जल्द ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने रखा जाना है। उनकी मंजूरी मिलते ही कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके बाद उम्मीद है 3 से 4 माह में इसे वाइल्ड डिवीजन घोषित कर दिया जाएगा।

घास के जंगल विकसित होंगे: वन्यप्राणी डिवीजन में बाघ सहित अन्य जानवरों की सुरक्षा के लिए घास के जंगल विकसित होंगे। पानी और सुरक्षा का प्रबंध किया जाएगा। स्टाफ को वन्यप्राणियों की देखरेख के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। गश्ती दल और वाहन बढ़ाए जाएंगे। वन्यप्राणियों को लेकर आसपास के लोगों को जागरुक किया जाएगा। डिवीजन की जिम्मेदारी ऐसे अफसर को सौंपी जाएगी, जो वन्यप्राणी प्रबंधन में दक्ष हों।

वाइल्ड डिवीजन में किया जा सकेगा निर्माण

नियमानुसार वाइल्ड लाइफ रिजर्व के कोर एरिया के आसपास किसी भी तरह की निर्माण कार्य की अनुमति नहीं होती। जबकि वाइल्ड डिवीजन में निर्माण कार्य किया जा सकता है। इसके अलावा डिवीजन में केवल वन्य प्राणियों के सुरक्षा के इंतजाम होते हैं और पेड़ आदि नहीं काटे जा सकते।

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