रीवा, सागर, उज्जैन सहित मप्र के आधा दर्जन हवाई अड्डे होंगे विकसित

नई दिल्ली। मप्र के रीवा, सतना, सागर और उज्जैन सहित बंद पडे करीब आधा दर्जन हवाई अड्डे अब विकसित होंगे। इन सभी का विकास नागरिक उड्डयन मंत्रालय की रीजनल कनेक्टीविटी स्कीम के तहत किया जाएगा। मंत्रालय ने इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी है। पहले फेज में देश के करीब 25 हवाई अड्डों के विकास की तैयारी है। इनमें अकेले मध्य प्रदेश के छह हवाई अड्डों को शामिल किया गया है। यह सभी मौजूदा समय में बंद पड़े हैं।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम(आईसीएस)के तहत मध्य प्रदेश के जिन छह हवाई अड्डों को चिन्हित किया है, उनमें रीवा, सतना, सागर, उज्जैन,पन्ना और खंडवा के हवाई अड्डे शामिल है।इनमें पन्नाा, खंडवा और सतना के हवाई अड्डे मौजूदा समय में एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया के है, जबकि रीवा, सागर व उज्जैन के हवाई अड्डे राज्य सरकार के नियंत्रण में है। बता दें कि हाल ही में पेश किए गए बजट में भी रीजनल कनेक्टीविटी स्कीम के तहत हवाई अड्डों के विकास के अलग से राशि की व्यवस्था भी की गई है।

लेकिन इसके विकास के लिए राज्यों को भी कुछ हिस्सा देना होगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्कीम के तहत मप्र के जिन छह हवाई अड्डों को चुना है,वह सभी मौजूदा समय में बंद पडे है। सीधे कहें, तो यहां से कोई भी कार्माशियल उड़ाने संचालित नहीं होती है। मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो योजना में ऐसे ही शहरों को चुना गया है, जो पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक जुडाव के नजरिए से काफी खास है।आने वाले दिनों में यहां रीजनल हवाई सेवाओं को विस्तार दिया जा सकता है।

मप्र के 28 हवाई अड्डे हैं खाली पड़े

इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो को छोड दें, तो मप्र के करीब 28 हवाई अड्डे मौजूदा समय में खाली पड़े है। यहां से कोई भी कार्माशियल उडान संचालित नहीं होती है। खासबात यह है कि इन 28 हवाई अड्डों में से 11 ऐसे हवाई अड्डे या हवाई पट्टियां है,जहां से उडान संचालित नहीं हो सकती है। यह नॉन आपरेशन स्थिति में है।देश में मौजूदा समय में करीब दो सौ एयरपोर्ट व एयर स्टिप ऐसी है,जहां से कोई भी उडान संचालित नहीं होती है।

 

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