गिरते भूजल स्तर पर केंद्र ने उप्र से मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली। भूजल स्तर उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से नीचे भाग रहा है, खेती पर बड़े संकट के रूप में उभर कर सामने आ सकता है। कृषि उत्पादन में कमी आ सकती है। इसको लेकर चिंतित केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है। कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में पूरब से पश्चिम तक भूजल में गिरावट की रिपोर्ट मिली हैं। जलमय भूमि और तालाबों का सूखना भी प्रमुख कारण हैं। निर्बाध रूप से जारी भूजल दोहन पर अंकुश के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

केंद्र को राज्य सरकार की रिपोर्ट का इंतजार है। बिगड़ते हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में 20-50 फीसद तक कमी आ गई है। कुछेक क्षेत्रों में इससे भी गंभीर हालात हैं। मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि अव्यवस्थित तरीके से विकास और जलस्रोतों के पुनर्जीवन के अभाव के कारण इस तरह के हालात पैदा हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में सूखा और भूजल स्तर का गिरना कोई नई बात नहीं है। गत वर्ष उप्र प्रदेश सरकार ने 75 में 50 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया था।

कृषि मंत्रालय के अधिकारी का कहना था कि भूजल स्तर में गिरावट रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसके लिए रास्ते प्रदेश सरकार को ही तलाशने हैं। किसानों को भी इस बात के लिए तैयार किए जाने की जरूरत है कि वे कुछ क्षेत्रों में प्रयोग के तौर पर धान की जगह दलहन और सब्जियों की खेती को तरजीह दें। कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त ने केंद्र को भेजी एक रिपोर्ट भी इस तरह के सुझाव दिए थे। इस पर अब अमल की जरूरत है।

राष्ट्रीय जल अयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 91 बड़े जलाशयों में जलस्तर एक दशक में सबसे नीचे है। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक व आंध्र प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश अंतर्गत बुंदेलखंड के जलाशय भी शामिल हैं।

जहां गंभीर है स्थिति

गाजियाबाद

मेरठ

बागपत

सहारनपुर

मथुरा

हाथरस

बांदा

हमीरपुर

जालौन

जौनपुर

वाराणसी

 

Random Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*