सबसे प्राचीन आवाहन अखाड़े की उज्जैन में हुई पेशवाई

उज्जैन। सबसे प्राचीन आवाहन अखाड़े की पेशवाई रविवार सुबह शुरू हुई। नीलगंगा तालाब पर पूजन के साथ सुबह 10:20 पर पेशवाई का आरंभ हुआ। अखाड़े की अगुवाई आराध्यदेव विघ्न विनाशक गणपति महाराज ने किया।

नीलगंगा तालाब से पेशवाई तीन बत्ती, टॉवर, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज, सतीगेट, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, गुदरी चौराहा, छोटी रपट होते हुए छावनी पहुंची।

अखाड़ा परिचय : सबसे पहले आवाहन अखाड़े की स्थापना

स्थापना: विक्रम संवत 603 (सन् 547)
मुख्यालय: वाराणसी
शाखाएं: इलाहाबाद, उज्जैन, नासिक
और हरिद्वार
नागा संत: 20 हजार
महामंडलेश्वर-7
संचालन: महंत सत्य गिरी एवं महंत
जयविजय भारती
उद्देश्य
सनातन परंपरा का प्रचार महाराज पृथ्वीराज के काल में उनके संघर्ष को देखकर, संतों ने भी तपस्थली त्याग संघर्ष की ठानी। एक-एक कर विभिन्न सैन्य संगठन (अखाड़े) तैयार हो गए, जिन्हें सधुक्कड़ी भाषा में अखाड़ा कहा जाता है।
दशनामी भाट के पास मिली एक पांडुलिपि के अनुसार सबसे पहले आवाहन अखाड़े की स्थापना हुई। सनातन धर्म के प्रचार के लिए देश भर में शाखाएं स्थापित की। स्थापना में मरीचिगिरी, दीनानाथ गिरी, भवहरणपुरी, हीराभारती, गणपति भारती को श्रेय जाता है।
ऐसे हुआ अखाड़े का नामकरण
यवनों से संघर्ष के लिए संन्यासियों से भी धर्म युद्ध में शामिल होने का आवाहन किया गया था। संतों के इस संगठन का नामकरण अखंड आवाहन पड़ा।

 

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