नीतीश और संघ में छिड़ा सीधा वाक् युद्ध

नई दिल्ली/पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ बोले, लेकिन यह पहला मौका है जब दोनों में सीधा वाक् युद्ध छिड़ा है। पहले नीतीश ने गैर संघवाद को हवा देते हुए कहा था कि इसके लिए सभी गैर-भाजपाई दलों का साथ आना होगा। इसके बाद संघ की ओर से एमजी वैद्य ने जवाबी हमला बोला कि संघ का जितना विरोध होगा, यह संगठन उतना ही बढ़ेगा।

यह कहा था नीतीश ने

  • सभी गैर-भाजपा दलों को एक साथ आना होगा क्योंकि अलग-अलग लड़ाई से कुछ फायदा नहीं होने वाला है।
  • स्वतंत्रता आंदोलन में आरएसएस की क्या भूमिका थी? गैरजरूरी रूप से राष्ट्रवाद की बहस और नारों की तरफ देश को मोड़ा जा रहा है।
  • भाजपा के तीन नेताओं अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को साइडलाइन कर दिया गया है और सारी ताकत उन लोगों के हाथ चली गई है जिनकी सेक्युलेरिज्म और सांप्रदायिक सौहार्द में कोई आस्था नहीं है।
  • नागपुर में तो भगवा ध्वज लहराता है और देश में तिरंगा लहराने की बात कर रहे हैं। और कश्मीर में जो हो रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है। जबसे दोबारा सरकार बनाई है ये सब और ज्यादा बढ़ गया है।
  • एक तरफ भाजपा है। दूसरी तरफ बाकी सबको एकत्रित करना होगा। अगर आज एकत्र नहीं हुए तो ये सबको खराब कर देंगे।

संघ का जवाबी हमला

  • संघ में नंबर दो हैसियत रखने वाले एमजी वैद्य ने कहा, संघ का जितना विरोध होगा, यह संगठन उतना ही बढ़ेगा।
  • संघ अपने दम पर देशभर में काम कर रहा है, किसी के सहयोग से नहीं। संघ के इतिहास से नीतीश परिचित नहीं है, इसलिए ऐसी बातें कर रहे हैं। नीतीश देश का मतलब नहीं समझ सकते।
  • वहीं संघ विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि नीतीश एक हसीन सपना देख रहे हैं और उससे उनको कोई नहीं रोक सकता। वो ध्यान रखें कि साम्यवादी दल आजादी के समय से ही ऐसे सपने देख रहे हैं और आज उनका क्या हश्र हो गया सब जानते हैं।
  • आरएसएस ने देश की संस्कृति और सामाजिकता में खुद को मजबूत किया और महत्वपूर्ण योगदान दिया। वो याद रखें कि संघ की बैसाखी से वो यहां तक पहुंचे हैं। तब क्यों नहीं उन्हे ये सब याद आया।
  • ये नीतीश की अवसरवादी सोच है और जुमलेबाजी कर रहे हैं। इनकी तुलना कन्हैया से करुंगा जो दोनों जुमलेबाजी में कॉम्पिटिशन कर रहे हैं।
  • संघ मुक्त भारत का सपना देखते देखते साम्यवादी और समाजवादी आंदोलन हाशिये पर चले गए नीतीश कुमार क्या इस तथ्य से अपरिचित हैं ?

 

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