उप्र की 3.8 करोड़ आबादी पर सूखे का असर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 25 जिलों की 99 तहसीलों के 25,533 गांवों पर सूखे का असर पड़ा है। 3,80,64,151 लोग सूखे से प्रभावित हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से सूखा प्रभावित जिलों का विवरण मांगे जाने पर राज्य सरकार ने केंद्रीय सूखा राहत आयुक्त को यह ब्योरा भेज दिया है। पिछले साल मानसून के रूठने के कारण सूखे की चपेट में आये 50 जिलों से प्राप्त सूचना के आधार पर शासन ने जो रिपोर्ट केंद्र को भेजी है उसमें सूखे से सबसे ज्यादा 44,00,765 लोग आगरा में प्रभावित हुए हैं।

दूसरे नंबर पर गोंडा है जहां की 34,05,376 आबादी सूखे की पीड़ा झेल रही है। तीसरे स्थान पर उन्नाव है जहां 32,94,068 लोग प्रभावित हैं। चौथा स्थान देवरिया का है जहां प्रभावित लोगों की संख्या 32,00,829 है। पांचवें नंबर पर गोरखपुर है जहां 31,20,480 लोगों पर सूखे का असर है। आबादी के लिहाज से सूखे का सबसे कम असर महराजगंज पर है जहां 23,000 लोग प्रभावित बताये गए हैं।

बुंदेलखंड के सभी जिले प्रभावित

बुंदेलखंड के सातों जिलों पर सूखे की मार पड़ी है। आबादी की दृष्टि से सबसे ज्यादा असर बांदा पर पड़ा है जहां सर्वाधिक 15,04,832 लोग प्रभावित हुए हैं। दूसरे स्थान पर ललितपुर है जहां 12,21,592 लोग सूखे का संकट झेल रहे हैं। तीसरे पायदान पर झांसी है जहां 11,64,749 लोग सूखे की चपेट में आए हैं। चौथा स्थान हमीरपुर का है जहां 11,04,862 लोग प्रभावित हैं। चित्रकूट इस कड़ी में पांचवें स्थान पर है जहां 9,90,626 लोगों पर सूखे का असर है। महोबा में 9,34,747 और जालौन में 31,996 लोग सूखे की आपदा झेलने को मजबूर हैं।

गोरखपुर के सबसे ज्यादा गांव चपेट में

जिन 25 जिलों में सूखे का असर बताया गया है, उनमें से गोरखपुर के सबसे ज्यादा 2681 गांव इस आपदा से प्रभावित हैं। इस क्रम में देवरिया दूसरे स्थान पर है जहां के 2178 गांव सूखे की चपेट में आये हैं। गोंडा इस कड़ी में तीसरे स्थान पर है जहां 1821 गांव प्रभावित हुए हैं। सबसे कम 12 गांव कानपुर नगर में सूखे से प्रभावित हुए हैं जबकि महराजगंज में ऐसे गांवों की संख्या 19 है। पिछले साल मानसून के रूठने के कारण सूखाग्रस्त घोषित किये गए 50 जिलों में से 21 ऐसे थे जिनमें फसलों को 33 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान हुआ था।

इन 25 जिलों में आबादी पर असर नहीं

केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट में सूखाग्रस्त घोषित जिन 25 जिलों में आबादी पर सूखे का असर शून्य बताया गया है उनमें पीलीभीत, बलिया, बागपत, फर्रुखाबाद, लखनऊ, बाराबंकी, औरैया, रामपुर, शाहजहांपुर, जौनपुर, बस्ती, प्रतापगढ़, इटावा, फैजाबाद, कानपुर देहात, कन्नौज, सुलतानपुर, चंदौली, गाजियाबाद, मैनपुरी, अमेठी, हाथरस, रायबरेली, सिद्धार्थनगर और कौशांबी शामिल हैं।

राहत के लिए केंद्र से मांगे 2057 करोड़

सूखाग्रस्त घोषित किये गए जिलों में किसानों को मुआवजा बांटने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र को 2057 करोड़ रुपये का मैमोरैंडम भेजा था। केंद्र सरकार की उच्च स्तरीय समिति ने इसमें से 1304 करोड़ रुपये स्वीकृत करने पर रजामंदी जतायी थी। बाद में केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2015-16 की शुरुआत में राज्य आपदा मोचक निधि में उपलब्ध धनराशि के 50 फीसद हिस्से को समायोजित करते हुए राज्य सरकार को 934.32 करोड़ रुपये जारी किये।

सूखाग्रस्त जिलों को अब तक 1005 करोड़

सूखाग्रस्त जिलों में आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक तीन किस्तों में कुल 1005 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा चुकी है। इसमें से 868 करोड़ रुपये हाल ही में जारी किये गए हैं।

 

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