दिल से… सिंहस्थ में उमड़ रहा जनसागर

उज्जैन। तीनों लोकों के स्वामी महाकाल की नगरी अवंतिका में प्रवेश करते ही एक अलौकिक अहसास होता है। अपार जनसागर की लहरें एक के बाद एक सिंहस्थ स्नान के लिए पुण्य सलिला शिप्रा के विशाल घाटों की ओर उमड़ती और पुण्य की डुबकी लगाकर एक अद्भुत अनुभूति के साथ पुन: जनसागर में विलीन हो जाती।

भीषण गर्मी और चांडाल योग के भय को मात देती श्रद्धालुओं की आस्था के साथ ही साधु-संतों के बीच विचरण करना एक अलग ही धार्मिक संसार की रचना करता है। कहीं जटाजूटधारी, कहीं भभूत मले नागा, कहीं भगवावेशधारी… अपने में ही रमे हुए। चारों ओर साधु-संतों, अखाड़ों के विशाल पंडाल अपनी भव्यता को प्रदर्शित कर रहे हैं।

मोह-माया से भरे संसार को त्यागने वाले साधु-संतों की भौतिक लालसा इन पंडालों में देखने को मिल रही है। मोक्षदायिनी शिप्रा में डुबकी का आनंद जीवनदायिनी नर्मदा की मौजूदगी से दोगुना हो जाता है। आखिर हो भी क्यों नहीं, ओंकार का जलाभिषेक करने वाली नर्मदा महाकाल के शीष विराज रही है।

समुद्र मंथन से निकले अमृत की बूंदों का गिरना और यहां पुण्य स्नान से पापों से मुक्ति के साथ मोक्ष मिलना मानव जीवन के लिए भी एक संदेश देता है …और वह संदेश यह है कि जीवन रूपी सागर में किए कर्मों का मंथन… इसमें छिपी विषरूपी (हलाहल) बुराइयों का त्याग और शेष बचे अमृत का पान। यही इस सिंहस्थ के पुण्य स्नान का उद्देश्य भी होना चाहिए।

 

Random Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*