दुनिया को एड्स से मुकाबले की 80 फीसदी दवा देता है भारत

संयुक्त राष्ट्र। दुनिया भर में एड्स जैसी खतरनाक बीमारी से मुकाबले के लिए प्रयोग की जा रही 80 फीसदी दवाओं की आपूर्ति भारत की दवा कंपनियां कर रही हैं। कम खर्च की जेनेरिक दवाएं विकासशील देशों में एड्स के इलाज तक पहुंचने में मददगार साबित हो रही हैं। आमसभा की उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पिछले 15 वर्षों के दौरान एड्स महामारी के कारण भारत ने “त्रासद परिणाम के प्रेत” का सामना किया है। लेकिन आज हमारा देश इस चुनौती का प्रभावी रूप से मुकाबला करने में सक्षम हो गया है।

देश आज एड्स के खिलाफ विश्वस्तरीय संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। दुनिया भर में एंडीरेट्रोवायरल औषधि प्रयोग में लाई जा रही है। भारतीय दवा कंपनियां दुनिया को मुकाबला करने वाली 80 फीसदी दवाओं की आपूर्ति कर रही हैं। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय एड्स विपत्ति के प्रतिघात को सहन नहीं कर सकेगा। विकासशील देश विश्वस्तरीय विपत्ति से संघर्ष में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर बल दे।

घोषणा पत्र को मंजूरी दी

संयुक्त राष्ट्र आमसभा ने एक नए राजनीतिक घोषणा पत्र को मंजूरी दी है। घोषणा पत्र में एचआइवी/एड्स जैसी विपत्ति से निपटने के लिए वहन योग्य दवाओं के महत्व पर जोर दिया गया है।

भारत में एड्स से मौत कम हुई

भारत में एड्स से होने वाली मौत में वर्ष 2007 से 55 फीसदी कमी आई है। एचआइवी के नए संक्रमण में वर्ष 2000 से 66 फीसदी कमी देखी जा रही है। एड्स से प्रभावित करीब दस लाख लोग अभी एंटीरेट्रोवायरल थेरापी पर हैं।

 

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