हर महिला को पता होने चाहिए अपने ये कानूनी अधिकार

मुफ्त कानूनी सहायता

लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987 के तहत बलात्कार की शिकार महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार है। जब भी कोई महिला खुद के लिए वकील हायर करने में आर्थिक रूप से अक्षम हो, पुलिस स्टेशन अधिकारी को शहर की लीगल सर्विस ऑथोरिटी को उसके लिए वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचना दी जाती है।

महिला गवाह को पुलिस स्टेशन से राहत

किसी भी भारतीय महिला गवाह को अपना बयान दर्ज करवाने के लिए पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया जा सकता। उसका बयान उसके घर पर ही दर्ज किया जा सकता है। वह चाहे तो बयान देते वक्त महिला पुलिस अधिकारी की मांग कर सकती है।

मुफ्त कानूनी सहायता

लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987 के तहत बलात्कार की शिकार महिलाओं को मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार है। जब भी कोई महिला खुद के लिए वकील हायर करने में आर्थिक रूप से अक्षम हो, पुलिस स्टेशन अधिकारी को शहर की लीगल सर्विस ऑथोरिटी को उसके लिए वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचना दी जाती है।

महिला गवाह को पुलिस स्टेशन से राहत

किसी भी भारतीय महिला गवाह को अपना बयान दर्ज करवाने के लिए पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया जा सकता। उसका बयान उसके घर पर ही दर्ज किया जा सकता है। वह चाहे तो बयान देते वक्त महिला पुलिस अधिकारी की मांग कर सकती है।

इक्वल रिम्यूनरेशन

इक्वल रिम्यूनरेशन एक्ट 1976 के तहत किसी भी कामकाजी महिला को पुुरुषों के समान कार्य के लिए समान पगार का हक दिया गया है। अगर कोई महिला किसी पुरुष के समकक्ष पद पर है तो उसे तनख्वाह कम नहीं दी जा सकती।

पहचान गुप्त रखने का अधिकार

भारतीय दंड संहिता की धारा 228 ए के अनुसार सेक्सुअल एसॉल्ट की शिकार हर महिला को अपनी पहचान गुप्त रखने का अधिकार है। मीडिया या पुलिस उस पर अपनी पहचान सार्वजनिक करने के लिए दबाव नहीं डाल सकती। कोई प्रकाशन अगर महिला की तस्वीर छाप दे तो उसे कैद की सजा हो सकती है। महिला अपना बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष अकेली या किसी महिला अधिकारी की उपस्थिति में दर्ज कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की विशाखा गाइडलाइन्स के मुताबिक अगर किसी कंपनी में कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या दस या उससे ज्यादा है तो वहां एक सेक्सुअल हरेसमेट कंप्लेंट्स कमेटी का गठन जरूरी है, जिसकी मुखिया एक महिला होनी चाहिए।

पैतृक संपत्ति पर अधिकार

हिंदू उत्तराधिकार एक्ट में 2005 में किए गए संशोधन के मुताबिक पिता की संपत्ति पर जितना हक बेटों का होता है, उतना ही बेटियों का माना गया है। अगर उनके भाई उन्हें जायदाद में से हिस्सा न दें तो उन्हें अपने पिता की संपत्ति पर दावा करने का पूरा हक है।

लिव इन रिलेशन

कानून ने लिव इन रिलेशन में रहने वाली महिलाओं को हक दिया है कि पार्टनर द्वारा सताए जाने पर वे घरेलू हिंसा कानून 2005 के तहत अपनी सुरक्षा की मांग कर सकती हैं। पार्टनर द्वारा प्रताडि़त महिलाएं कानून के मुताबिक आर्थिक हरजाना या अन्य तरह की राहत की मांग कर सकती हैं।

ईमेल से एफआईआर मान्य

अगर कोई महिला किसी कारणवश पुलिस स्टेशन जाने में सक्षम न हो पा रही हो तो वह अपनी प्राथमिकी ईमेल या रजिस्टर्ड पोस्ट से भी किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को भेज सकती है। बाद में वह अधिकारी थाने के इन चार्ज को शिकायत की जांच करने और एफआईआर लिखने के निर्देश दे सकता है।

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