प्रभु यीशु ने क्रोध के बारे में बताई बड़े काम की बातें

सदियों से प्रभु यीशु ने अपने ज्ञान के प्रकाश से दुनिया को दिशा देते आए हैं। उनके ज्ञान में आत्मिक मार्मिकता है। प्रेम और स्नेह है। विश्वास और उम्मीद की वो नई उमंग है, जिसे पाकर अनुयायी स्वंय परमपिता परमात्मा को अपने नजदीक ही मौजूद महसूस करता है।

# प्रभु यीशु ने कहा, ‘यदि कोई मेरे द्वार पर प्रवेश करे तो वह उद्धार पाएगा’

# प्रभु यीशु ने कहा कि, ‘ पृथ्वी और आकाश मिट जाएंगे परन्तु मेरी बातें कभी न मिटेंगी।’

# मैं तुम से कहता हूं कि हत्या करना तो दूर की बात है, तुम अपने भाई पर क्रोध तक न करना।

# प्रभु यीशु ने कहा कि तुम किसी पर दोष मत लगाओ, ताकि तुम पर भी दोष न लगाया जाए।

# प्रभु यीशु क्षमा करने की जरूरत पर बल देते हुए कहते हैं कि तुम एक दूसरे के अपराध क्षमा किया करो तो परमपिता परमेश्वर तुम्हारे भी अपराध क्षमा करेगा।

# तुम शत्रुओं से प्रेम रखो और जो तुमको सताते हैं उनके लिए प्रार्थना करो। इस प्रकार तुम अपनेपिता की सन्तान कहलाओगे क्योंकि वह अपने सूर्य को भले और बुरे दोनों प्रकार के लोगों पर चमकाता है।

# प्रभु यीशु ने कहा है, व्यभिचार न करना, परन्तु मैं तुमसे कहता हूं कि किसी स्त्री को तुम बुरी नज़र से न देखना क्योंकि जो कोई किसी स्त्री को बुरी नज़र से देखता है, वह उसके साथ अपने मन में व्यभिचार कर चुका है|

# पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और जंग लग जाता है या उसे चोर चुरा लेते हैं। लेकिन अपने लिए स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न कीड़ा, न जंग लगता है और न ही चोर चुरा सकता है।

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