वासंतिक नवरात्र 28 से, रामनवमी चार अप्रैल को

कुरुक्षेत्र और हरिद्वार के ज्योतिषविदों की राय में हिंदू नव वर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला शक्ति आराधना का पर्व वासंतिक नवरात्र इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 28 मार्च से शुरू होकर चार अप्रैल तक चलेगा।

चैत्र मास की नवमी तिथि पर चार अप्रैल को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

कुरुक्षेत्र स्थित मां कात्यायनी मंदिर के पीठाध्यक्ष बलराम गौतम कहते हैं कि नवसंवत का शुभारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होता है और इसी दिन चैत्र नवरात्र का शुभारंभ भी होता है। कुलाली पंचांग के अनुसार, संवत 2074 में 28 मार्च को नवरात्र में घट स्थापन किया जाएगा।

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु में स्पष्ट उल्लेख है कि अगर प्रतिपदा तिथि का क्षय हो तो भी नवरात्र का आरंभ अमावस्या वाले दिन प्रतिपदा में होगा। इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का क्षय है, इसलिए इस वर्ष वासंतिक नवरात्र का आरंभ अमावस्या वाले दिन 28 मार्च को होगा।

बलराम गौतम का कहना है कि अष्टमी व नवमी को लेकर इस बार भ्रम की स्थिति है। भगवान श्रीराम का जन्म मध्य व्यापनी चैत्र शुक्ल नवमी में पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। चार अप्रैल को मध्याह्न के समय नवमी पुनर्वसु नक्षत्र में है। अतः इस वर्ष श्रीदुर्गाष्टमी व श्रीरामनवमी एक ही दिन 4 अप्रैल को मनाई जाएगी।

चार अप्रैल को अष्टमी सुबह 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगी, उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। पांच अप्रैल को नवमी सुबह 10 बजकर 04 मिनट तक रहेगी।

गंगाधाम मंदिर के ज्योतिषी निरंजन पराशर के मुताबिक बीते दिनों ज्योतिषाचायोर् की बैठक हुई थी, जिसमें रामनवमी का पर्व चार अप्रैल मंगलवार को मनाने का निर्णय लिया गया था।

नवरात्र का पर्व यूं तो वर्ष में चार बार पौष, चैत्र, आषाढ़ व आश्विन मास में आता है, किंतु प्रसिद्धि चैत्र (वासंतिक) और आश्विन (शारदीय) नवरात्र को ही मिली।

हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी व पंडित शक्तिधर शास्त्री भी यही बताते हैं कि शक्ति आराधना का पर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष चैत्र प्रतिपदा यानी 28 मार्च मंगलवार से शुरू होंगे।

सप्तऋषि स्थित तुलसी मानस मंदिर के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर अर्जुनपुरी महाराज ने बताया कि चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि मंगलवार चार अप्रैल को पड़ रही है।

श्रीकाशी विश्र्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक समिति के सदस्य ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, हिंदू नव वर्ष के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला शक्ति आराधना का पर्व वासंतिक नवरात्र इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 29 मार्च से शुरू होकर पांच अप्रैल तक चलेगा।

चैत्र मास की नवमी तिथि पर पांच अप्रैल को ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

नवरात्रि में क्या करते हैं श्रद्धालु

  • मान्यता है कि देवी दुर्गा को लाल रंग सर्वप्रिय है, इसलिए नवरात्रि व्रतधारी को लाल रंग के आसन, पुष्प और वस्त्र का प्रयोग करना चाहिए।
  • प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि व्रतधारी सुबह और शाम देवी दुर्गा के मंदिर में या अपने घर के मंदिर में घी का दीपक प्रज्जवलित करते हैं और दुर्गा सप्तसती और दुर्गा चालीसा का पाठ करते हैं। फिर देवी की आरती करते हैं।
  • नवरात्रि में अनेक श्रद्धालु नौ दिन उपवास रखते हैं या एक समय को भोजन नहीं करते हैं या फिर केवल फलाहार पर रहते हैं।
  • प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों घर पर आई किसी भी कन्या को खाली हाथ विदा नहीं किया जाता है।
  • नवरात्रि के नौवें दिन नव कन्याओं को घर बुलाकर भोजन कराया जाता है।

नवरात्रि में ये करना है मना

  • मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में 9 दिन दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाई जाते हैं। इन दिनों नाखून काटने के लिए भी मना किया जाता है।
  • जो व्रतधारी नवरात्रि में कलश स्थापना करते हैं और माता की चौकी स्थापित करते हैं, वे इन 9 दिनों में घर खाली छोड़कर नहीं जा सकते हैं।
  • मान्यताओं के अनुसार इस दौरान खाने में प्याज, लहसुन और मांसाहार (नॉन-वेज) वर्जित होता है।
  • व्रत रखने वालों को 9 दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए। उन्हें बेल्ट, चप्पल-जूते, बैग जैसी चमड़े की चीजों के इस्तेमाल से बचने के लिए कहा जाता है।
  • नवरात्रि व्रतधारी नौ दिनों तक खाने में अनाज और नमक का सेवन नहीं करते हैं। पौराणिक आख्यानों के अनुसार, नवरात्रि व्रत के समय दिन में सोने, तम्बाकू चबाने और ब्रह्मचर्य का पालन न करने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है।

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