सर्वकामना पूर्ति के लिए कीजिए यह व्रत

यह व्रत सर्वकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु जी की आराधना की जाती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के शुभ दिन यह व्रत किया जाता है।

यह व्रत यदि विधि-विधान से किया जाए तो सभी तरह के पाप नष्ट होते हैं। यह बात स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कही थी। जिसका उल्लेख हमारे धार्मिक पौराणिक ग्रंथों में मिलता है।

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताने के लोमश ऋषि द्वारा राजा मान्धाता को सुनाई गई कथा को सुनाया था। यह कहानी कुछ इस तरह है। इस पौराणिक कथा का विस्तार से उल्लेख भविष्योत्तर पुराण में किया गया है।

चैत्ररथ सुन्दर वन में तप में लीन थे। वह च्यवन ऋषि के पुत्र थे। वह जिस वन में तप कर रहे थे उसमें एक दिन मंजुघोषा नामक अप्सरा की पहुंची। उसने चैत्ररथ को देखा तो मोहित हो गई। और उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने के प्रायस करने लगीं।

उसी समय कामदेव भी उधर से कहीं जा रहे थे। उन्होंने अप्सरा के मन की बात जान उसकी सहायता की। इस तरह चैत्ररथ भी अप्सरा पर मोहित हो गए। काम के वशीभूत होकर चैत्ररथ तप करना भूल गए। वह बहुत समय तक अप्सरा के साथ रहे, लेकिन जब उन्हें ज्ञात हुआ तो बहुत देर हो चुकी थी।

वह काफी गु्स्सा हुए और अप्सरा को शाप दिया कि वह पिशाचनी बन जाए क्योंकि उसने एक तप रहित व्यक्ति को मोहपाश में बांध रखा था। शाप सुनकर अप्सरा डर गईं और चैत्ररथ से क्षमा मांगी। इसके बाद ऋषि चैत्ररथ ने क्षमा करते हुए अप्सरा को चैत्र कृष्ण की एकादशी को व्रत करने के लिए और पापमोचिनी एकादशी की महिमा को बताया।

पापमोचिनी एकादशी आने पर अप्सरा ने यह व्रत किया और वह पिशाचिनी की योनि से मुक्त हो गई। इसके साथ ही उसके सारे पाप भी दूर हो गए। श्रीकृष्ण बोले, ‘तभी से पापमोचिनी एकादशी व्रत किया जाता है।’

ऐसे करें व्रत: सुबह नित्य कर्म के बाद स्नान करें। भगवान विष्णु जी के चतुर्भुज रूप की पूजा करें। दिन भर उपवास रखें। मन में काम वासना को न आने दें। एकादशी तिथि को जागरण करने से कई गुणा पुण्य मिलता है अत: रात्रि में भी निराहार रहकर भजन कीर्तन करते हुए जागरण करें।

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