आधार कार्ड बनाने के पैसे लिए तो 50 हजार जुर्माना और एफआईआर

इंदौर। आधार कार्ड पंजीयन के लिए ऑपरेटर 1 जुलाई से किसी तरह का शुल्क नहीं ले सकेंगे। ऐसा करने वालों पर अब न केवल जुर्माना लगेगा, बल्कि केस भी दर्ज होगा। शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने इस बारे में सख्त नियम लागू कर दिए हैं। इसके डर से शहर के कई आधार पंजीयन करने वाले सेंटर बंद होने लगे हैं। अब बचे रहने वाले केंद्रों पर भीड़ और बढ़ने के आसार हैं।

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) की ओर से पंजीकृत एजेंसियों के रूप में रजिस्टर्ड आईटी कंपनियों को नए नियमों को लेकर ऑफिस मेमोरेंडम भेजे हैं। नए नियमों के डर से शहर में चल रहे 50 से ज्यादा आधार पंजीयन केंद्रों में से 10 से अधिक बंद हो चुके हैं। आधार के लिए पंजीकृत एजेंसियों के पास बीते महीनों में चार से ज्यादा सर्कुलर दिल्ली से पहुंचे हैं।

पैसा नहीं ले सकते : शासकीय नियम के मुताबिक आधार कार्ड का पंजीयन करवाने वाले नागरिक से कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। इसके बाद भी शिकायतें सरकार तक पहुंच रही थीं कि कार्ड बनाने के लिए ज्यादातर केंद्रों पर पैसा वसूला जा रहा है। इसके बाद सरकार ने पैसा मांगने वाले ऑपरेटरों पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाने का निर्देश दिया था।

शिकायतें जारी रहने पर केंद्र सरकार ने सख्त नियम लागू कर दिया है। इसके तहत पैसा मांगने वाले ऑपरेटर पर हर केस के लिए 50 हजार रुपए जुर्माना लगेगा। वहीं भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए उसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा।

रजिस्टर्ड कंपनी ने ऐसे किसी मामले में ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं कराई तो यूआईडीएआई कंपनी के कर्ताधर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएगी। आधार रजिस्ट्रेशन सेंटर पर इस सूचना का बोर्ड भी लगाना होगा कि रजिस्ट्रेशन के लिए किसी तरह की फीस नहीं लगती। दिल्ली से आए आदेश में लिखा गया है कि अधिकारी किसी भी सेंटर की अचानक जांच करेंगे। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी।

छेड़खानी पर एक लाख जुर्माना

पंजीयन करने वाली एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि किसी ऑपरेटर ने बॉयोमेट्रिक मशीन को बायपास कर पंजीयन किया तो जुर्माने की राशि एक लाख रुपए होगी। दरअसल, कई बार दबाव में या खास लोगों को उपकृत करने के लिए सिस्टम के बाहर से फोटो या जानकारी लेकर पंजीयन कर दिया जाता है। प्रभावशाली लोग पहले से खींची फोटो भी कार्ड पर लगवा लेते हैं। इसी के साथ कार्ड पर उर्फ के रूप में एक से ज्यादा नाम दर्ज करना भी प्रतिबंधित किया गया है। पंजीयक एजेंसियों पर ही यह जिम्मेदारी डाली गई है कि वे खुद अपने सेंटर का निरीक्षण कर तय करें। यदि ऑपरेटर ऐसा कर रहे हैं तो उस सेंटर को बंद कर दें।

इसलिए हुए बंद

आधार के इनरॉल एजेंसी के रूप में रजिस्टर्ड इंदौर की कंपनी ओसवाल कम्प्यूटर के निदेशक बीएस नागौरी के मुताबिक हर कार्ड के लिए एजेंसी को सरकार की ओर से ही 30 रुपए दिए जाते हैं। कार्ड बनाने के लिए जगह से लेकर सिस्टम, संसाधन आदि की व्यवस्था करना रजिस्ट्रेशन करने वाली एजेंसी की जिम्मेदारी होती है।

कुछ कंपनियों ने फ्रेंचाइजी की तरह आधार सेंटर खुलवा दिए। सायबर कैफे और ऐसी जगह खुले सेंटरों पर कंपनी न तो कर्मचारियों को तनख्वाह देती है, न ही इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करती है। वहां के ऑपरेटर लोगों से पैसा लेकर काम कर रहे हैं। इसी कारण गड़बड़ी हो रही है। अब गड़बड़ियों पर कार्रवाई की जवाबदेही भी रजिस्टर्ड एजेंसी पर आ रही है। इसी से बचने के लिए कुछ कंपनियों ने अपने सेंटर बंद कर दिए हैं। हमारे 35 सेंटर शहर में चल रहे हैं। व्यवस्था चाकचौबंद करने के लिए सीसीटीवी कैमरों से मुख्यालय से निगरानी की व्यवस्था भी लागू कर दी है।

इसलिए बढ़ेगी भीड़

सख्त नियमों के बाद आधार रजिस्ट्रेशन के केंद्र बंद हो रहे हैं, लेकिन आधार कार्ड की जरूरत स्कूल के एडमिशन से लेकर पैनकार्ड, बैंक खाते और हर दस्तावेज के लिए लग रही है। सरकार ने नए निर्देशों के बाद नई एजेंसियों के पंजीयन भी रोक दिए हैं।

सिर्फ इसके लिए फीस

पहली बार आधार कार्ड बनवाने पहुंचे व्यक्ति का पंजीयन और पूरी प्रक्रिया निशुल्क रहेगी। बाद में कार्ड में किसी तरह के संशोधन के लिए ऑपरेटर सिर्फ 25 रुपए शुल्क ले सकेगा। इसके अतिरिक्त ई-आधार सर्च के लिए 10 रुपए और आधार कार्ड का पीवीसी कार्ड बनाने के लिए 30 रुपए लिए जा सकते हैं।

यहां करें शिकायत

आधार पंजीयन के लिए पैसा मांगा जाता है। सुधार संशोधन के लिए तय से ज्यादा शुल्क या नियम तोड़ने की शिकायत नागरिक वेबसाइट पर कर सकते हैं। साथ ही पंजीकरण केंद्र पर दर्शाए संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी के फोन नंबर पर भी ऐसी शिकायत की जा सकती है।

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