नर्मदा में छोड़ा जा रहा MP के शहरों का गंदा पानी, गुजरात HC में याचिका

अहमदाबाद। मध्यप्रदेश के शहरों का गंदा पानी नर्मदा में छोड़े जाने का मामला गुजरात हाई कोर्ट में उठा है। याचिका में कहा गया है कि मध्यप्रदेश के 14 जिलों से नर्मदा गुजर रही है और शहरों का गंदा पानी बगैर फिल्टर किए नर्मदा में डाला जा कहा है। इससे गुजरात के लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वीएम पंचोली की खंडपीठ ने नर्मदा जल संसाधन, जलापूर्ति विभाग, गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्र सरकार के पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय सहित राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 27 जनवरी 2018 को है।

मामले से जुड़ी बड़ी बातें

– अहमदाबाद के कार्तिकुमार भट्ट ने यह जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने कहा है कि वह वर्ष 2013 में नर्मदा परिक्रमा के लिए अमरकंटक गए थे। वहां उन्होंने देखा कि नर्मदा में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है।

– नर्मदा गुजरात में 160 किलोमीटर का मार्ग तय अरब सागर मिलती है। इस प्रदेश के अधिकांश हिस्से के लोग नर्मदा के पानी का उपयोग करते हैं।

– यही पानी सौराष्ट्र के लोगों की प्यास बुझाता है। राजस्थान के बाडमेर व जालोर के लोग भी नर्मदा के पानी का इस्तमाल करते हैं।

– याचिका में विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि गंदा पानी मिलाए जाने के कारण ही कई स्थानों पर नर्मदा का पानी पीने लायक नहीं बचा है।

मध्यप्रदेश में नहीं कोई ट्रीटमेंट प्लांट

याचिका में बताया गया है कि 1300 किलोमीटर के लंबे बहाव वाली नर्मदा मध्यप्रदेश के 14 जिलों व 11 बड़े शहरों- अमरकंटक, डिंडोर, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, सिहोर, देवास, हरदा, खरगोन, बड़वानी और धार से गुजरती है। यहां गंदे पानी के ट्रीटमेंट का कोई प्लान्ट नहीं है।

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