MP में रोजाना बच रहा 7 लाख लीटर दूध, इस्तेमाल की कोई योजना नहीं

इंदौर। प्रदेश में उपभोक्ताओं के उपयोग के बाद रोजाना करीब 7 लाख लीटर दूध बच रहा है। मप्र स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क फेडरेशन इस बचे हुए दूध का क्या करे, उसके लिए मुश्किल खड़ी हो गई है। दूध उत्पादन में तो मध्यप्रदेश देश में तीसरा बड़ा राज्य बन गया, लेकिन इस बढ़े हुए दूध को संभालने की यहां कोई योजना नहीं है।

फेडरेशन के पास केवल 2.50 लाख लीटर दूध का पावडर बनाने की क्षमता है। ऐसे में बचा हुआ करीब 4.50 लाख लीटर दूध प्रदेश सहित राजस्थान के निजी प्लांटों पर भेजकर पावडर बनवाया जा रहा है। प्रदेश में इस साल जैसी मुश्किल कभी नहीं आई।

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