मध्यप्रदेश का अगले पाँच साल का विकास रोडमैप तैयार

इंडिया टूडे “स्टेट ऑफ स्टेट्स” कान्क्लेव में मुख्यमंत्री श्री चौहान

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश का सुनियोजित विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास को और ज्यादा गति देने के लिये अगले पाँच वर्षों का रोडमैप तैयार कर लिया गया है। शहरी विकास पर 83 हजार करोड़ खर्च किये जायेंगे। श्री चौहान आज यहाँ एक पत्रिका समूह के इंडिया टूडे ‘स्टेट ऑफ द स्टेट्स कांक्लेव’ को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने ‘स्टेट ऑफ द स्टेट्स’ रिपोर्ट का विमोचन भी किया।

पत्रिका समूह द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, जल और स्वच्छता, कृषि, उद्योग, सेवा प्रदाय, व्यवस्था और सम्पन्नता एवं कानून व्यवस्था की प्रगति और श्रेष्ठ व्यवस्थाओं के आधार पर जिलों के प्रदर्शन का आंकलन किया है।

शिक्षा के क्षेत्र में ग्वालियर को सर्वश्रेष्ठ जिला और प्रगतिशील जिला घोषित किया गया है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में रायसेन को सर्वश्रेष्ठ और गुना को प्रगतिशील तथा अधोसंरचना के क्षेत्र में भोपाल को सर्वश्रेष्ठ तथा मंडला को प्रगतिशील जिला घोषित किया गया है। इसी प्रकार जल एवं स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर को सर्वश्रेष्ठ और सतना को प्रगतिशील जिला, उद्योग के क्षेत्र में कटनी को सर्वश्रेष्ठ और शहडोल को प्रगतिशील जिला घोषित किया गया है। सेवा प्रदाय के क्षेत्र में भोपाल को सर्वश्रेष्ठ और अनूपपुर को प्रगतिशील, सम्पन्नता में इंदौर को सर्वश्रेष्ठ और हरदा को प्रगतिशील एवं कानून व्यवस्था में श्योपुर को सर्वश्रेष्ठ और खंडवा को प्रगतिशील जिला घोषित किया गया है। इन सभी क्षेत्रों में इंदौर को सम्पूर्ण रूप से सर्वश्रेष्ठ और रीवा को प्रगतिशील जिला घोषित किया गया है। कार्यक्रम में इन जिलों के जिलाध्यक्षों और उनके प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया और अच्छा कार्य करने की सराहना की गई।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकास के क्षेत्र में जिलों के प्रदर्शन का आंकलन कर उन्हें सम्मानित करने की पहल सराहनीय है। इससे अधिकारियों का मनोबल बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की विकास यात्रा की शुरूआत आधारभूत अधोसंरचना में सुधार के साथ हुई थी। आज प्रदेश में सड़क, बिजली, पानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत अधोसंरचनाएँ हैं। कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। एक दशक पहले सिंचाई क्षमता केवल साढ़े सात लाख हेक्टेयर थी, जो अब 40 लाख हेक्टेयर है। अगले पाँच वर्षों में यह 80 लाख हेक्टेयर होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि आधारित अर्थ-व्यवस्था वाले प्रदेश में किसानों की उन्नति के बिना समृद्धि नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि किसानों के लिये खेती की लागत कम करना और उनकी उपज का वाजिब मूल्य दिलवाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसे राज्य सरकार ने पूरा किया है। किसान समृद्धि योजना में गेहूँ खरीदी 2000 रूपये प्रति क्विंटल हो गयी है। किसान युवा उद्यमी योजना में 3000 खाद्य प्र-संस्करण इकाइयाँ स्थापित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि बासमती उत्पादक किसानों की लड़ाई को अंतिम समय तक लड़ेंगे और इसे जीआई टैग दिलवायेंगे। केन्द्र सरकार मध्यप्रदेश के किसानों के साथ है।

श्री चौहान ने कहा कि राज्य के संसाधनों पर गरीबों का समान अधिकार है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिये देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना बनाई गई है। श्रमिकों के बच्चों को पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक शिक्षा की फीस नहीं देनी होगी। उनका इलाज भी मुफ्त होगा।

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