सागर में सदगुरू कबीर महोत्सव में राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द संत कबीर के भक्ति आन्दोलन और रचनाओं ने समाज को बदला – राज्यपाल श्रीमती पटेल

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द ने कहा है कि कबीर का सूफी दर्शन आज भी प्रासंगिक है। समाज में समरसता और भाईचारे की भावना के प्रसार के लिये सभी को संत कबीर के दर्शन को अपनाने की जरूरत है। संत कबीर ने अपनी सहनशीलता के बल पर समाज की सोच बदल दी। उन्होंने पूरी दुनिया को मानव कल्याण का रास्ता दिखाया। राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि सदैव चलायमान रहने वाले की किस्मत भी चलती है। राष्ट्रपति श्री कोविंद आज केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर के राजमाता विजयाराजे सिंधिया स्वर्ण जयंती सभागार में सदगुरू संत कबीर महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।

राष्ट्रपति श्री कोविन्द ने कहा कि संत शिरोमणि कबीर का उत्सव सागर में मनाया जाना बेहद उपयुक्त है। यहाँ संत कबीरजी का 300 साल पुराना आश्रम है। आश्रम उनके उपदेश समरसता और त्याग का प्रचार कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरधा विकास निगम की जिम्मेदारी श्री नारायण प्रसाद कबीरपंथी को सौपी है। राज्य सरकार यहाँ बुनकरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण और उनके उत्पादों की मार्केटिंग तथा स्व-रोजगार के लिये सहायता दे रही है। इससे बड़ी संख्या में प्रदेश के दस्तकार आर्थिक आत्म-निर्भरता प्राप्त कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि संत कबीर की वाणी में प्रेम झलकता है। उनकी ख्याति इस बात से प्रतीत होती है कि महाराष्ट के संत तुकारामजी, असम के शंकरदेवजी और यहाँ तक कि गुरूग्रंथ साहिब में भी कई बार कबीरजी का जिक्र किया गया है। राष्ट्रपति श्री कोविंद ने कहा कि वेदों में चरैवेति-चरैवेति कहा गया है। इस सूक्ति को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने चरितार्थ किया। राष्ट्रपति ने कहा कि बुन्देलखण्ड अंचल में प्रेम और करूणा का प्रवाहमय सागर झलकता है। कबीर भजन गाने वाली मंडलियों में यह प्रेम साफ दिखाई देता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज हम सबके लिये यह गौरव की बात है कि हमारी राज्यपाल इस समृद्वशाली संस्कृति से ओत-प्रोत सरल ह्रदय वाले प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख हैं। उन्होंने कहा मध्यप्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल संत कबीर के आदर्शों को अपने जीवन में चरितार्थ करती आ रही है। उन्होंने राज्यपाल के जीवन के यादगार पलों का जिक्र करते हुए कहा कि विवाह के दौरान परिवार से दी जाने वाली भेंट को नकारते हुए उन्होंने अदम्य साहस दिखाया। राष्ट्रपति ने कहा कि बेटियों में स्वावलंबन एवं आत्म-विश्वास तेजी से बढ़ रहा है। अब विवाह के पहले ही बेटियाँ ससुराल में शौचालय की जानकारी लेने लगी हैं।

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि संत कबीर का भक्ति आन्दोलन और उनकी रचनाएँ समाज को गहरे स्तर तक प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कबीर ऐसे पहले संत हैं जिन्हें सभी धर्मों के लोग आदर और सम्मान देते हैं। वे एक ईश्वर को मानते थे। उन्होंने लोक-कल्याण के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया।

शुरूआत में संत रविदास हस्तशिल्प एवं हाथकरधा विकास निगम के अध्यक्ष एवं सदगुरू कबीर महोत्सव के संयोजक श्री नारायण प्रसाद कबीरपंथी ने कार्यक्रम की रूपरेखा बतायी। गृह मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव, सांसद श्री प्रहलाद पटेल, संत श्री रामदासजी और अन्य संत मंचासीन थे। अंत में सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव ने आभार माना। महापौर श्री अभय दरे, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन, श्री प्रदीप लारिया, श्री हरवंश सिंह राठौर सहित बड़ी में कबीरपंथी श्रद्धालु भी मौजूद थे।

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