पिछले चार साल में आर्थिक मोर्चे पर कैसी रही मोदी सरकार?

नई दिल्ली 
पीएम नरेंद्र मोदी 26 मई को अपनी सरकार के चार साल पूरे कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश को अब तक का सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म सिस्टम दिया, पुराने दिवालियापन कानून को नया रूप दिया, पुराने रुके हुए प्रॉजेक्ट को फिर से शुरू किया और अपनी परफॉर्मेंस से वर्ल्ड बैंक को यह कहने पर मजबूर कर दिया कि भारत बिजनस करने के लिहाज से दुनिया का तीसरा सबसे बेहतर देश है। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था में अभी सब कुछ ठीक नहीं है। ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था के नजरिए से मोदी सरकार के चार साल का आंकलन किया गया है। 

सरकारी और प्रावेट बैंकों में धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। बैंकों का डूबे हुए कर्ज का ढेर अब तक का सबसे बड़ा हो चुका है। निवेशक मजबूत डॉलर के बीच भारतीय शेयरों और बॉन्डों को खत्म कर रहे हैं। शुरुआती तीन साल के बाद अब एफडीआई में भी कोई खास बढ़ोतरी नजर नहीं आ रही है। 

मोदी की भारतीय जनता पार्टी ने साल 2014 में जबरदस्त बढ़त के साथ सरकार बनाई थी। चुनाव के दौरान मोदी ने बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, भ्रष्टाचार खत्म करने, गरीबों का उत्थान करने का वादा किया थ। मोदी के पास इन सब वादों को पूरा करने के लिए महज एक साल बचा है। सामाजिक और आर्थिक मोर्चों पर मोदी सरकार को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। यहां जानिए कि मोदी के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था ने कैसा काम किया। 

जीडीपी 
आंकड़े बताते हैं कि मोदी के जीडीपी कैलकुलेट करने के तरीके बदलने के बाद देश की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त तेजी आई। नवंबर 2016 में अचानक नकदी पर शिकंजा कसने से उन लाभों को खत्म कर दिया और मार्च में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 2.3 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में पिछले चार साल की सबसे धीमी रफ्तार का अनुमान लगाया गया। मोदी जैसे-जैसे अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष में पहुंचे चीन के मुकाबले भारत की जीडीपी चीन से कुछ पीछे नजर आ रही है। 

ट्रेड डेफिसीट 
सोने के लिए भारत के बढ़ते प्यार और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने देश के व्यापार को घाटे में रखा है। बीजेपी सरकार के दौरान यह घाटा बढ़ा है। चीन के साथ बहुत घनिष्ठ संबंध न होने के बावजूद चीन से भारत का आयात बढ़ा है। भारत अमेरिका के साथ एक व्यापार अधिशेष चलाता है, लेकिन इससे मुद्रा में हेरफेर के लिए भारत को यूएस ट्रेजरी की वॉच लिस्ट में रखता है। 

इसके अलावा करंट अकाउंट डेफिसीट की बात करें तो मोदी की पॉलिसी ने फॉरेन इन्वेस्टमेंट को भारत में लाने में काफी मदद की और 10 साल में पहली बार इसमें रेकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई, लेकिन अमेरिकी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अभी काफी मशक्कत करने की जरूरत है। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट फरवरी में पेश किया। उन्होंने स्वास्थ्य और किसानों को आमदनी को बढ़ाने का वादा किया, लेकिन इन वादों को पूरा करने में अभी पूरा होमवर्क करना बाकी है। 


Source: khabar1

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