सामान्य मॉनसून 2019 चुनाव से पहले ऐसे खत्म कर देगा मोदी की मुश्किलें

नई दिल्ली 
देश में 70 फीसदी बारिश के लिए जिम्मेदार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस साल इंतजार नहीं कराया और समय से 3 दिन पहले दक्षिणी छोर पर केरल के तटों पर दस्तक दी. भारतीय शेयर बाजार पर अच्छे मॉनसून के अनुमान पर मॉनसून आधारित कंपनियों के शेयर्स में जमकर उछाल देखने को मिल रही है. वहीं जब 28 मई को मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही बैठी तो 29 मई को शेयर बाजार में ऐसी कंपनियों के शेयरों में कारगर उछाल दर्ज हुई. अब उम्मीद है कि मौसम विभाग की नॉर्मल मानसून की भविष्यवाणी पूरी तरह सटीक बैठने के बाद मौजूदा वित्त वर्ष की सबसे बड़ी राहत मोदी सरकार को मिलने जा रही है.

मौसम-कृषि-आर्थिक जानकारों का दावा है कि जब आम चुनावों को एक वर्ष के कम समय बाकी हो और देश में मानसून की स्थिति ठीक हो तो इसका सबसे ज्यादा फायदा केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी को मिलता है क्योंकि अच्छे मॉनसून से सरकार के पक्ष में यूं पलट जाती आर्थिक तस्वीर. दरअसल मौसम विभाग ने पिछले महीने 16 अप्रैल को अनुमान जताया कि इस साल मानसून निराश नहीं करेगा और लगातार चार महीने तक देश के अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छी बारिश देखने को मिलेगी.

मौसम विभाग का अनुमान है कि सामान्य मानसून और समय से पहले आया मानसून इस साल खरीफ फसल के लिए वरदान साबित होगा और इसके साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का काम करेगा. गौरतलब है कि यह दक्षिण-पश्चिम मानसून देश में कुल बारिश का 70 फीसदी रहता है और देश की 2.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए बारिश के तौर पर रक्तसंचार का काम करता है.

मौसम और कृषि जानकारों का कहना है कि सामान्य और अच्छा मानसून किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा करता है जिससे देश के ग्रामीण इलाकों में क्रय क्षमता में इजाफा होता है. मानसून के समय से पहले आगमन पर देश में किसानों को चावल, गन्ना, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसे अहम कैश क्रॉप की बुआई को प्राथमिकता देने में मदद मिलती है. वहीं सामान्य मानसून की स्थिति में यह फसल अच्छी पैदावार के साथ किसानों की आमदनी में बढ़ोत्तरी करती है. गौरतलब है कि देश में अधिकांश क्षेत्रों में सिंचाई के लिए किसानों की निर्भरता पूरी तरह मानसून पर है. गौरतलब है कि 2015 में सामान्य मानसून के बाद लगातार दो साल किसानों को सूखे की स्थिति का सामना करना पड़ा. ऐसे में अच्छा मानसून किसानों का अच्छा दिन लाने जा रहा है और खरीफ की अच्छी पैदावार ने आमदनी में कारगर इजाफा किया तो आम चुनावों में फायदे की कटाई मोदी सरकार करेगी.

फैक्ट्रियों को मिल जाएगी लाइफलाइन, बढ़ेगी डिमांड

देश में ग्रामीण इलाकों में अच्छी पैदावार से किसानों की क्रय शक्ति में इजाफा होता है. किसानों के लिए यह मॉनसून अहम है तो इस मॉनसून के दौरान होने वाली खरीफ खेती उनकी वार्षिक आमदनी के प्रमुख जरिया है. इसी खेती के सहारे ग्रामीण इलाकों में सोना, कार, मोटर साइकिल, ट्रैक्टर, टीवी, फ्रिज, फर्टिलाइजर इत्यादि उत्पादों की बिक्री में भी बड़ा इजाफा होता है. लिहाजा, अच्छे मॉनसून की उम्मीद पर देश की फैक्ट्रियां अपनी उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा करती है. अच्छे मॉनसून से ग्रामीण इलाकों में पैदा होने वाली डिमांड कंपनियों के वार्षिक बजट में नफा-नपकसान को हरे निशान में ले आते हैं. गौरतलब है कि 16 अप्रैल को मौसम विभाग की सामान्य मॉनसून की भविष्यवाणी के बाद से की एफएमसीजी सेक्टर की कंपनियां तैयारी में जुटी हैं. कोलगेट पालमोलीव, हिंदुस्तान यूनिलीवर और डाबर इंडिया समेत ट्रैक्टर बनाने वाली महिन्द्रा एंड महिन्द्रा और फर्टिलाइजर कंपनियां जैसे जीएनएफसी, पंजाब केमिकल्स और इफको और हीरो, सुजुकी समेत कई ऑटोमोबाइल कंपनियां इस अच्छे मानसून के सहारे अपने अच्छे दिन देख रही हैं. इन क्षेत्रों में अच्छे दिनों का भी सीधा फायदा केन्द्र में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार को मिलेगा.

महंगाई पर लगाम, ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ

अच्छा मानसून देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़े फैसले के लिए जिम्मेदार रहता है. बीते तीन वर्षों के दौरान कमजोर मानसून के चलते केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती को टालने का काम किया है. रिजर्व बैंक की दलील रही है कि कमजोर मानसून के चलते देश में महंगाई बढ़ने की आशंका है. ऐसे में ब्याज दरों में कटौती से महंगाई बेकाबू होने का डर रहता है. लिहाजा, इस बार अच्छे मानसून के चलते केन्द्रीय बैंक की यह दलील कमजोर पड़ जाएगी और आर्थिक जानकारों का दावा है कि अच्छे मॉनसून के बाद ब्याज दरों में कटौती का रास्ता साफ हो जाएगा. ब्याज दरों में कटौती से देश में कारोबारी गतिविधिया तेज होने की मजबूत परिस्थिति बनती है और निजी क्षेत्र से निवेश की संभावनाओं में इजाफा हो जाता है. इन सभी असर से देश में महंगाई पर भी लगाम लगती है. ऐसी स्थिति में आम चुनावों से पहले इन बदलावों का सीधा असर सत्तारूढ़ सरकार की लोकप्रियता बढ़ने पर पड़ता है.


Source: SAMACHARTODAY

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