भारत में ही बनाने की कोशिश को लगा झटका आर्मी के लिए सामान

नई दिल्ली 
करगिल- सियाचीन और इसी तरह 12 हजार फीट से ज्यादा ऊंचाई पर तैनात सेना के जवानों के लिए जरूरी सामान भारत में बनाने की कोशिशों को झटका लगा है। यूजर ट्रायल में 90 पर्सेंट से ज्यादा प्रॉडक्ट फेल हो गए और जो 3 प्रॉडक्ट पास हुए हैं वह भी भारतीय नहीं हैं। सेना ने पिछले हफ्ते वेंडर्स मीटिंग की थी जिसमें उन्हें बताया गया कि किसका प्रॉडक्ट ट्रायल में पास हुआ है और किसका फेल। 
 
महज तीन प्रॉडक्ट हुए पास, पर भारतीय नहीं

सूत्रों के मुताबिक करीब 70 वेंडर्स ने सेना को ट्रायल के लिए प्रॉडक्ट्स बना कर दिए थे। जिसमें 4 फॉरेन वेंडर्स भी थे। सेना के जवानों के लिए जरूरी करीब 14 अलग अलग प्रॉडक्ट ट्रायल में शामिल थे। इसमें सेना के जवानों के लिए जरूरी, थ्री लेयर ग्लव्ज, मल्टी परपस बूट, सॉफ्ट स्नो पर चलने वाले बूट, हार्ड स्नो और स्नो के पहाड़ पर चलने वाले बूट्स (बूट क्रैपऑन), स्लीपिंग बैग और कैराबीना (एक तरह का फंदा जो लॉक हो जाता है) भी शामिल था। अभी यह सारे प्रॉडक्ट्स सेना के लिए इंपोर्ट किए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक महज तीन प्रॉडक्ट्स पास हुए। जिसमें मल्टी परपज बूट, कैराबीना और रिको डिटेक्टर (एक उपकरण जो बर्फीले तूफान में फंसे होने पर रेडियो सिग्नल देता है जिससे मदद मिल सके) शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक ये प्रॉडक्ट जिन वेंडर्स के हैं वह वैसे तो भारतीय हैं लेकिन ये प्रॉडक्ट उन्होंने इटली या दूसरे देशों से आउटसोर्स कर मंगाए हैं। इस तरह से इन प्रॉडक्ट्स को भारतीय नहीं कहा जा सकता। सेना ने अब इन वेंडर्स से कहा है कि वह इन प्रॉडक्ट की असेंबली लाइन भारत में ही तैयार करें। पहली बार वेंडर्स के साथ मीटिंग में सियाचीन से यूजर्स खुद भी आए थे। यूजर्स ने बताया कि किस तरह से ट्रायल होता है और कोई प्रॉडक्ट क्यों रिजेक्ट हुआ। 

क्यों जरूरी हैं भारतीय प्रॉडक्ट 

अभी ऊंचाई पर तैनात सेना के जवानों की स्पेशलाइज्ड क्लोदिंग का ज्यादातर सामान इंपोर्ट ही होता है। जिस पर हर साल करीब 800करोड़ रुपये का खर्च आता है। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक अंदर पहनने वाले गर्म कपड़े, स्नो गॉगल्स, पिट्ठू बैग, फेस मास्क अब भारत में ही बनने लगे हैं जिससे सालाना करीब 200 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। लेकिन अभी भी ज्यादातर प्रॉडक्ट इंपोर्ट होने से सालाना 500 करोड़ से ज्यादा का खर्चा करना पड़ता है। 


Source: SAMACHARTODAY

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