10 करोड़ से बड़ी ठगी पर ‘अडिशनल’ निगरानी, महाराष्‍ट्र पुल‍िस में फेरबदल

मुंबई 
पिछले सप्ताह महाराष्ट्र पुलिस में जो फेरबदल हुए, उसमें सबसे महत्चपूर्ण पोस्टिंग आईपीएस अधिकारी प्रभात कुमार की है। उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) का अडिशनल डीजी बनाया गया है। महाराष्ट्र पुलिस में ईओडब्ल्यू के अडिशनल डीजी का पद पहली बार बनाया गया है। 

पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रभात कुमार मुंबई को छोड़कर महाराष्ट्र के सभी शहरों के आर्थिक अपराध से जुड़े केस देखेंगे। जो आर्थिक अपराध 10 करोड़ रुपये से ऊपर के होंगे, उन्हें वह ही सुपरवाइज करेंगे। मुंबई में आर्थिक अपराध शाखा का प्रमुख जॉइंट सीपी रैंक का अधिकारी होता है। इस पद पर पिछले सप्ताह विनय चौबे की पोस्टिंग हुई है। 

सुपरवाइज करेंगे अडिशनल डीजी 
मुंबई के बाहर अमूमन पुलिस उपाधीक्षक रैंक का अधिकारी ही 3 करोड़, 10 करोड़ या उससे ऊपर के केसों को सुपरवाइज करता था, पर राज्य सरकार ने अब इस पुरानी परंपरा में बदलाव किया है। अब 10 करोड़ रुपये से ऊपर के केसों का इनवेस्टिगेशन भले ही इंस्पेक्टर या उपाधीक्षक रैंक का अधिकारी करे, उसको सुपरवाइज अडिशनल डीजी रैंक का अधिकारी करेगा। 

ठगी की जांच लोकल पुलिस करेगी 
पहले 50 लाख रुपये से ऊपर के आर्थिक अपराध ही आर्थिक अपराध शाखा के पास जांच के लिए आते थे। कुछ महीने पहले सरकार ने यह दायरा बढ़ाया और फैसला किया कि 3 करोड़ रुपये से नीचे तक की ठगी की जांच लोकल पुलिस करेगी। उसके ऊपर के केस पुलिस स्टेशन से सीधे आर्थिक अपराध शाखा को ट्रांसफर किए जाएंगे। यह नियम अभी भी लागू है। बस, परिवर्तन एक ही हुआ है। अब आर्थिक अपराध शाखा 3 करोड़ रुपये से ज्यादा और 10 करोड़ रुपये से नीचे के ठगी के केस तो स्वतंत्र रूप से देखेगी, लेकिन इसके ऊपर के केस ईओडब्ल्यू के नए अडिशनल डीजी के पास निगरानी के लिए चले जाएंगे। 

यह बदलाव भी हुआ 
आर्थिक अपराधों की जांच के लिए मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के पास पहले एक सायबर सेल हुआ करता था। अब वह बंद कर दिया गया है। मुंबई क्राइम ब्रांच चीफ आशुतोष डुंबरे ने सोमवार को बताया कि इस सेल के कर्मचारियों को हमने अब आर्थिक अपराध शाखा में ट्रांसफर कर दिया है। डुंबरे मुंबई क्राइम ब्रांच में आने से पहले आर्थिक अपराध शाखा के चीफ हुआ करते थे। उनके अनुसार, आर्थिक अपराध से जुड़े केसों में यदि जांच में कोई साइबर एंगल आता था, तब हम साइबर पुलिस स्टेशन की मदद लेते थे। 


Source: SAMACHARTODAY

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