ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को कीमोथेरपी से बच जाएंगा एक टेस्ट

भारत में हर 3 में से 1 ब्रेस्ट कैंसर पेशंट्स कीमोथेरपी से बच जाएंगे अगर इस बीमारी के दोबारा होने के खतरे की भविष्यवाणी करने वाले टेस्ट की कीमत कम हो और ज्यादा से ज्यादा लोग इसका खर्च उठा पाएं। इस तरह से कई टेस्ट्स में से एक है ऑन्कोटाइप डीएक्स टेस्ट जो सबसे ज्यादा मान्य है लेकिन बेहद महंगा है।

सिर्फ 5% मरीज उठा पाते हैं टेस्ट का खर्च
एम्स के प्रफेसर और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के हेड डॉ एस वी एस देओ कहते हैं, ‘सिर्फ 5 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो ऑन्कोटाइप डीएक्स टेस्ट का खर्च उठा सकते हैं क्योंकि इसकी कीमत 3 लाख रुपये है। बाकी के मरीजों के लिए हम क्लिनिकल असेसमेंट करते हैं और उसके आधार पर यह तय करते हैं कि उन्हें कीमोथेरपी की जरूरत है या नहीं।’ मैक्स डेकेयर ऑन्कोलॉजी सेंटर के सीनियर डायरेक्टर डॉ पी के जुल्का कहते हैं कि प्राइवेट सेक्टर में भी सिर्फ 20 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जो इस तरह के टेस्ट्स का खर्च उठा पाते हैं। ऑन्कोटाइप डीएक्स एक ऐसा टेस्ट है जो विदेशों में तो एक दशक से ज्यादा समय से मौजूद है। इस टेस्ट में बीमारी से जुड़े 21 जीन्स के आधार पर बीमारी के दोबारा होने के खतरे को 0 से 100 के स्केल पर आंका जाता है।

दोबारा बीमारी होने के खतरे को बताता है
इस टेस्ट में खुलासा हुआ है कि टेस्ट के दौरान ऐसी महिलाएं जो 0 से 10 के बीच आती हैं उनमें दोबारा ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बेहद कम होता है लेकिन जो महिलाएं 26 से 100 के बीच आती हैं उनमें दोबारा ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन 11 से 25 के बीच आने वाली महिलाएं किस कैटिगरी में आएंगी इसका खुलासा नहीं हुआ। हालांकि द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च जिसे यूएस नैशनल कैंसर इंस्टिट्यूट का समर्थन हासिल है ने साबित किया है कि 11 से 25 के स्कोर ग्रुप में आने वाली महिलाओं में भी दोबारा ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बेहद कम होता है और उन्हें भी कीमोथेरपी की जरूरत नहीं होती।

50% मरीजों की बीमारी का खुलासा अडवांस्ड स्टेज में
दुनियाभर के करीब 70 प्रतिशत ब्रेस्ट कैंसर पेशंट्स इसी 11 से 25 वाली कैटिगरी में आती हैं और एक्सपर्ट्स की मानें तो इस टेस्ट से मरीजों को काफी फायदा होगा। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अगर भारत में टेस्ट्स मौजूद हो तब भी सिर्फ 30 से 35 प्रतिशत मरीजों को ही टेस्ट से फायदा होगा क्योंकि भारत में करीब 50 प्रतिशत ब्रेस्ट क्रैंसर के मरीजों में यह बीमारी अडवांस्ड स्टेज में पता चलती है। बाकी बचे 50 प्रतिशत में से 30 से 35 प्रतिशत ऑन्कोटाइप डीएक्स टेस्ट करवा सकते हैं जिससे पहले ही इस बात का पता चल जाएगा कि उन्हें दोबारा यह बीमारी होने का खतरा है या नहीं और उन्हें कीमोथेरपी की जरूरत है या नहीं।

1.5 से 2.5 के बीच होता है कीमोथेरपी का खर्च
दरअसल, कीमोथेरपी के एक साइकल की कीमत प्राइवेट अस्पतालों में 20 से 30 हजार रुपये होती है। ब्रेस्ट कैंसर पैशंट्स को आमतौर पर कीमोथेरपी के 8 से 9 साइकल करने होते हैं जिसका खर्च 1 लाख 60 हजार से 2 लाख 70 हजार के बीच होता है, ऊपर से सर्जरी और हॉर्मोन थेरपी का खर्च अलग। ऐसे में अगर ऑन्कोटाइप डीएक्स टेस्ट कम कीमत पर मरीजों को उपलब्ध हो जाए तो इससे ज्यादा से ज्यादा मरीज लाभान्वित होंगे क्योंकि टेस्ट से पता चल जाएगा कि उन्हें कीमोथेरपी की जरूरत है या नहीं।


Source: SAMACHARTODAY

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