शांति स्थापित करने की कोशिश ‘बेअसर’, रमजान में सीजफायर के दौरान बढ़ी आतंकी घटनाएं: जम्मू कश्मीर

श्रीनगर 
केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर में रमजान के दौरान शांति बनाए रखने के लिए सीजफायर का जो फैसला किया था, उसका अबतक वैसा प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा जैसे की उम्मीद की जा रही थी। घाटी में आतंक संबंधी हिंसा की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, इतना ही नहीं पिछले 20 दिनों की बात करें तो ये पहले के मुकाबले ज्यादा हो गई हैं। मिले डेटा के मुताबिक, हिंसा की घटनाएं, आम लोगों का मारा जाना और सुरक्षा बल के जवानों का शहीद होना पिछले साल के इन्हीं दिनों के मुकाबले बढ़ गया है। 
 
पिछले 20 दिनों की बात करें तो आतंकियों ने तीन दर्जन से ज्यादा लोगों (पुलिस और सुरक्षा बल के जवान शामिल) की जान ली। साथ ही श्रीनगर में अलग-अलग जगहों पर 18 हैंड ग्रेनेड फेंके गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें दो दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। 

 
इस साल जनवरी से अबतक 143 लोग जिसमें 37 आम नागरिक, 71 आतंकी मारे गए वहीं सुरक्षबल के 31 जवान शहीद हुए। 143 में से 3 दर्जन लोग सिर्फ रमजान में हुई सीजफायर के दौरान मारे गए हैं। वहीं, 40 नए कश्मीरी युवा जिहाद के नाम पर आतंकी संगठनों में शामिल हो गए। 

महबूबा मुफ्ती ने की थी सीजफायर की गुजारिश 
2017 की शुरुआत में घाटी में आतंकी घटनाओं के बढ़ने का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने वहां नए सिरे के आतंकियों की खोज का अभियान चलाया था। कहा जाता है कि ऐसा अभियान 15 साल बाद चलाया गया था। हालांकि, विपक्षी पार्टियों की बात सामने रखते हुए जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रमजान और अमरनाथ यात्रा के दौरान सीजफायर करने की गुजारिश की थी। फिर केंद्र सरकार ने कश्मीर में रमजान के महीने के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से सशर्त सीजफायर की घोषणा की थी। 

हालांकि, अपने फैसले में सरकार ने यह भी कहा था कि भले ही जवानों को कोई नया ऑपरेशन शुरू ना करने के लिए कहा गया हो, लेकिन अगर उन पर कोई हमला किया जाता है तो वह इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। 

सीजफायर के दौरान आतंकी घटनाओं के बढ़ने पर बात करते हुए एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘आतंकी संगठनों से जुड़ रहे युवाओं के बीच पाकिस्तान और जिहाद के प्रति इतना लगाव भर दिया जाता है कि रमजान में शांति बनाए रखने की जो कोशिश है उसका उनपर कोई असर नहीं होता। मतलब यह सब उनके लिए मायने ही नहीं रखता है।’ 

आतंकियों को मिला एकत्रित होने का मौका 
वहीं, सुरक्षा एक्सपर्ट मानते हैं कि सेना द्वारा अभियान को रोकने की वजह से आतंकियों को दक्षिण कश्मीर में फिर के एकत्रित होने का मौका दे दिया है। हालांकि, अभी भी जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजी एसपी वैद्य को उम्मीद है कि केंद्र सरकार द्वारा लागू सीजफायर का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा।


Source: SAMACHARTODAY

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