मनमोहन के चहेतों को मोदी सरकार में भी मिला पूरा सम्मान

नई दिल्ली 
यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई एक चीज उन्हें पूर्व की सरकार से अलग करती है, तो वह है ब्यूरोक्रेट्स के टैलंट को लेकर उनका नजरिया। इस मामले में वह कांग्रेस से काफी अलग हैं। कांग्रेस ने 2004 में सत्ता में आने के बाद वाजपेयी सरकार के कैबिनेट सेक्रटरी, डिफेंस सेक्रटरी, और होम सेक्रटरी को एक झटके में हटा दिया था। जबकि पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद ऐसा नहीं किया।  
 

अनिल बैजल, जो अभी दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं, को यूपीए शासन में होम सेक्रटरी से अर्बन डिवेलपमेंट में भेज दिया गया था, जबकि डिफेंस सेक्रटरी अजय प्रसाद को सिविल एविएशन सेक्रटरी बना दिया गया था। पीएम मोदी ने पूर्व की सरकार में चले आ रहे ब्यूरोक्रेट्स के साथ ही काम करना जारी रखा। यहां तक कि उन्होंने यूपीए सरकार में कैबिनेट सेक्रटरी रहे अजीत सेठ को अपनी सरकार में ऐक्सटेंशन भी दिया। मोदी सरकार में जिस एक ब्यूरोक्रेट को हटाया गया था, वह थे होम सेक्रटरी अनिल गोस्वामी, जिन्हें एक फोन कॉल को लेकर चल रही सीबीआई जांच के विवाद की वजह से हटाया गया था। डिफेंस सेक्रटरी आरएस माथुर ने अपना कार्यकाल जारी रखा और बाद में उन्हें चीफ इन्फॉर्मेशन कमीशनर बनाया गया। 

बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू और कश्मीर के चीफ सेक्रटरी के तौर पर नियुक्त करना इसका ताजा उदाहरण है, जहां यह बात साफ हो जाती है कि मोदी सरकार में ब्यूरोक्रेट्स को चुनने में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को आड़े नहीं आने दिया गया। सुब्रमण्यम यूपीए 1 में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के प्राइवेट सेक्रटरी थे। इसके बाद यूपीए-2 में उन्हें जॉइंट सेक्रटरी बनाया गया था। यहां तक कि मनमोहन सरकार में रहे ज्यादातर अधिकारी में अब मोदी सरकार के भी भरोसेमंद बन गए हैं। 

डिफेंस सेक्रटरी संजय मिश्रा भी इसका उदाहरण हैं। सुब्रमण्यम की तरह ही, वह मनमोहन सरकार में पीएमओ में जॉइंट सेक्रटरी थे। वह पहले रोड ऐंड ट्रांसपोर्ट सेक्रटरी थे और बाद में डिफेंस मिनिस्ट्री का काम उन्हें दिया गया। रूस में भारत के राजदूत पंकज सरन भी मनमोहन सरकार में पीएमओ में जॉइंट सेक्रटरी थे। उन्हें भरोसेमंद आदमी के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने पुतिन और मोदी के बीच संबंधों को मजबूत करने में काफी मदद की। मोदी सरकार में उन्हें अब डेप्युटी नैशनल सिक्यॉरिटी अडवाइजर के तौर पर आगे लाया गया है। 

यहां तक कि यूपीएससी मेंबर्स सेलेक्शन में, फिलहाल मेंबर के तौर पर काम करने वाली सुजाता मेहता भी मनमोहन सरकार में पीएमओ में थी। हालांकि राजनीतिक मामलों में स्थिति कुछ अलग है। यूपीए सरकार में गवर्नर रहे सभी लोगों में एनएन वोहरा (जम्मू और कश्मीर) और एएसएल नरसिंहमन (आंध्र प्रदेश और तेलंगाना) को छोड़कर सभी इस्तीफा देने को कह दिया गया था। 

इस मामले में सरकार ने साफ कर दिया था कि जो अधिकारी यूपीए मंत्रियों के प्राइवेट सेक्रटरी के तौर पर काम कर चुके हैं, वे बीजेपी मंत्रियों के साथ फिर से काम नहीं करेंगे। 
 


Source: NEWS

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