16,500 पेड़ कटे तो दिल्लीवालों को कई वर्षों तक मिलेगी कम ऑक्सिजन

 नई दिल्ली
साउथ दिल्ली में 16,500 पेड़ों के कटने का दिल्ली पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस असर अगले करीब 20 वर्षों तक दिखाई देगा। पेड़ कटने के बाद निर्माण होने पर प्रदूषण में तेजी से इजाफा होगा। यही नहीं, पेड़ों के कटाव की खबर पढ़ने के बाद द्वारका का ग्रीन सर्कल ग्रुप भी मामले में केस दायर करने की तैयारी कर रहा है। 
 
ग्रीन सर्कल में कार्यरत केवी सिल्वराजन के अनुसार, यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है। हम पेड़ों को बचाने के लिए कई वर्षों से काम कर रहे हैं। हमें पता है कि एक पौधे को पेड़ बनने में कितना समय और पानी लगता है। एकसाथ 16,500 पेड़ों को काटने का मतलब अगले कई वर्षों तक दिल्ली से बड़ी मात्रा में ऑक्सिजन छीन लेना है। 

 
‘नीम और पीपल देते हैं ज्यादा ऑक्सिजन’ 
ग्रीन सर्कल एनजीओ के मुताबिक, एक पेड़ एक साल में 260 पाउंड यानी 118 किलो ऑक्सिजन देता है। दो बड़े पेड़ चार लोगों के परिवार को पूरी जिंदगी ऑक्सिजन देने के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, पेड़ कितनी ऑक्सिजन प्रदान करते हैं यह उनकी किस्म, मोटाई और उनके प्रकार पर निर्भर करता है। नीम और पीपल ज्यादा मात्रा में ऑक्सिजन छोड़ते हैं जबकि कीकर से ऑक्सिजन नहीं मिलती है। 

‘साउथ दिल्ली पर होगा सबसे ज्यादा असर’ 
सेफ (सोशल ऐक्शन फॉर फॉरेस्ट ऐंड इन्वाइरनमेंट) के फाउंडर विक्रांत तोंगड़ के अनुसार, निश्चित तौर पर पेड़ों के कटने का सबसे अधिक असर साउथ दिल्ली पर होगा। उन्होंने कहा कि पेड़ों को काटने की जगह अन्य रास्ते निकालने चाहिए। विक्रांत ने कहा, दिल्ली का ग्रीन कवर कई शहरों से अच्छा है, लेकिन 3-4 साल में कई बड़े प्रॉजेक्ट के तहत पेड़ों को काटने का ग्राफ बढ़ा है। वह चाहे प्रगति मैदान का रिडिवेलपमेंट हो या फिर सड़कों को चौड़ा करने का प्लान। एक तथ्य यह भी है कि 16,500 पेड़ों में सभी पेड़ बड़े नहीं है इसलिए प्रभाव के आंकलन के लिए स्टडी जरूरी है। प्रभावित पेड़ों में कुछ पेड़ गुलाब, गुड़हल के भी हैं। विक्रांत ने बताया कि जानकारी मिली है कि इन पेड़ों को अब पानी भी नहीं दिया जा रहा है, यह क्रूरता है। 

चिपको आंदोलन पर विचार कर रही आप 
बता दें कि आम आदमी पार्टी (आप) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र अपनी पुनर्विकास योजना के तहत राष्ट्रीय राजधानी में 17,000 पेड़ों को काटने की योजना बना रहा है लेकिन वह इस कदम के विरुद्ध चिपको आंदोलन जैसा आंदोलन चलाने पर विचार कर रही है। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि नौरोजी नगर , नेताजी नगर , सरोजिनी नगर , मोहम्मदपुर , श्रीनिवासपुरी , कस्तूरबा नगर और त्यागराज नगर में सात कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए वर्तमान 21,040 पेड़ों में से 14,031 पेड़ काटे जाएंगे। 
 


Source: Buisness

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