छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन किया काम, सुनाया यह जरूरी फैसला

मुंगेली
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने छुट्टी होने के बावजूद एक मामले की सुनवाई की और फैसला भी सुनाया. दरअसल, मामला मुंगेली जिले के जनपद पंचायत के पथरिया गांव में सरपंच पद के उपचुनाव की था, जिसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने अगली तारीख तय कि थी, अगर इस मामले में कोर्ट ने फैसला ना दिया होता तो चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई होती.

जानकारी के अनुसार मुंगेली के पथरिया ग्राम पंचायत में निर्मल दिवाकर सरपंच चुने गए थे, लेकिन उन पर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगा, जिसकी जांच के बाद नायब तहसीलदार ने 4 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर जमीन खाली करवा ली. मामले में अनुविभागिय अधिकारी के प्रतिवेदन पर जिला कलेक्टर ने पंचायती राज अधिनियम 1993 की धारा 36 के तहत सरपंच को बर्खास्त कर दिया.

मामले में सरपंच ने बिलासपुर कमिश्नर के सामने अपली याचिका दायर की थी, जिसे 23 जून को स्वीकार कर कलेक्टर के आदेश को रद्द कर दिया था, लेकिन इस बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीख रविवार 24 जून को तय की. इसके बाद सरपंच निर्मल दिवाकर ने मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की. 24 जून को रविवार होने के कारण मामले की सुनवाई होना मुश्किल लग रहा था, लकिन एडिश्नल रजिस्टर्ड जुडिशियल ने मुख्य न्यायाधीश की अनुमति से जस्टिस गौतम भादुरी को इस केस की सुनवाई के लिए अधिकृत किया.

हाईकोर्ट जस्टिस गौतम भादुरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने बंगले पर ही प्रकरण की सुनवाई की. इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से सतीश गुप्ता व निर्वाचन आयोग की तरफ से रणवीर सिंह ने पैरवी की, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और उप चुनाव पर अगली सुनवाई तक के लिए नतीजे पर रोक लगा दी. कोर्ट ने आदेश मे कहा कि शासकीय अधिवक्ता जिला निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराएं की चुनाव के नतीजे घोषित नहीं किए जाए.


Source: NEWS

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