पाक कोर्ट के सख्त तेवर सिख वॉर्डन को बेघर करने पर

लाहौर 
पाकिस्तान की एक अदालत ने देश के पहले सिख पुलिस अधिकारी और उनके परिवार को घर से जबरन निकालने के लिए इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के दो सदस्यों और पंजाब पुलिस के एक अधिकारी को अवमानना नोटिस भेजा है। गुलाब सिंह शाहीन ने बुधवार को एक विडियो में दावा किया था कि ईटीपीबी से संपत्ति विवाद के बाद उन्हें उनकी पत्नी और बच्चों के साथ लाहौर के डेरा चहल गांव में उनके घर से जबरन निकाल दिया गया। इसी के बाद शाहीन कोर्ट गए। 
 
लाहौर सेशन कोर्ट ने इस बारे में अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद यातायात वॉर्डन और उनके परिवार को बाहर करने पर ईटीपीबी अधिकारियों और पंजाब पुलिस के निरीक्षक इम्तियाज अहमद को नोटिस जारी किया है। पाक के एकमात्र सिख वॉर्डन 2006 में यातायात पुलिस से जुड़े थे। 

शाहीन ने कहा कि बोर्ड के अधिकारियों और पुलिस निरीक्षक ने उन्हें यातना दी और उनकी बांह तोड़ दी। शाहीन ने कहा कि वह 1996 से अपने घर में रह रहे थे। उन्होंने कहा, ‘ईटीबीपी ने इस जमीन को गुरुद्वारा के लंगर हॉल का हिस्सा बताते हुए अपनी कार्रवाई को उचित ठहराया है। मेरे दादा यहां 1947 से रह रहे थे और अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद मेरे घर को सील करने का बोर्ड को कोई अधिकार नहीं है।’ पाकिस्तान के एकमात्र सिख वॉर्डन 2006 में पंजाब यातायात पुलिस से जुड़े थे। 

इस घटना पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि हम इस घटना की निंदा करते हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। हम पाकिस्तान से अपील करते हैं कि इस मामले में ईमानदारी से जांच हो। 


Source: NEWS

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