सरगुजा में हैं 125 से ज्यादा जंगली हाथी, एक महीने में तोड़े 70 मकान

 अंबिकापुर 
सरगुजा संभाग के सघन वन प्ररिक्षेत्र के बीच बसे कई गांवों में लोगों के रातों की नींद इन दिनों हाराम हो गई है। लोग दहशत के सहारे रातें गुजार रहे हैं। दिनभर लोग अपने काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन शाम ढलते ही उनके चेहरे पर दहशत नजर आने लगती है।

चैन से घर पर सो नहीं सकते। डर लगा रहता है कि कब हाथियों का दल गांव में घुस आएगा। लोगों को हाथियों से बचने के लिए अपने घर छोड़कर गांवों में बने सामुदायिक भवनों में शहर लेनी पड़ रही है। पिछले एक माह के दौरान यहां अलग-अलग गांवों में घुसे हाथियों के दल ने करीब 70 मकानों को तोड़ दिया और लगभग 200 एकड़ में लगी फसल को नुकसान पहुंचाया है।

शुक्रवार की रात कोरिया जिले के जनकपुर में स्थित वन विभाग के डीपो परिसर में 5 हाथियों का दल घुस आया। परिसर में कुछ कर्मचारियों के आवास भी हैं। यहां से लोग जैसे जानबचाकर भागे, लेकिन दो महिलाएं अंदर ही फंसी रह गईं।

दहशत के साए में कुछ घंटे गुजारने के बाद इन महिलाओं को गांव वालों ने वन विभाग की टीम की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। वहां से हाथियों को खदेड़ा गया। यह दल अब जनकपुर से भगवानपुर की ओर जंगलों में घुस गया है।

गांव के लोग रात भर मसाल और पटाखे लेकर गांव की रखवाली करने में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस क्षेत्र में हाथियों के दो दल सक्रीय हैं। इनमें से एक में 11 और दूसरे दल में 5 हाथी हैं। इसके अलावा दूसरे दल से बिछड़ा एक और हाथी यहां स्वतंत्र विचरण कर रहा है।

उधर दूसरी ओर सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र के सकरिया जंगल में भी हाथियों का एक बड़ा दल सक्रीय है जिससे आस-पास के गांव के लोग दहशत में हैं। यह दल मेनपाठ की ओर से होता हुआ यहां आया है।

सूरजपुर जिले के मोहनपुर क्षेत्र में भी हाथियों का एक दल पिछले एक माह से दिखाई दे रहा है। हाथियों के आतंक को देखते हुए पूरे संभाग में वन विभाग की टीम अलर्ट पर है।

दलों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है और संरक्षित क्षेत्र के बाहर लगाई गई सुरक्षा फेंसिंग के उस पास इन्हें खदेड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। गांवों में सतर्कता को लेकर शाम ढ़लते मुदादी कराई जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ये हाथी दल दिनभर जंगलों में रहते हैं और शाम ढ़लते ही गांवों का रुख करने लगते हैं।


Source: NEWS

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