सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई नहीं कर रही अहम गवाह से पूछताछ

मुंबई
सोहराबुद्दीन शेख मर्डर केस में एक प्रमुख गवाह को सीबीआई ने कथित रूप से नजरअंदाज कर दिया। इस मामले में 6 आरोपियों को सोमवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। महेंद्र सिंह झाला ने 11 मार्च, 2010 को सीबीआई को दिए अपने बयान में आरोप लगाया था कि सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एटीएस) अभय चुदास्मा ने उनसे जान की धमकी देकर पैसे ऐंठे।

उन्होंने आरोप लगाया था कि ऐसा ही सोहराबुद्दीन के साथ किया गया था। उसके बाद से सीबीआई ने उन्हें पूछताछ के लिए नहीं बुलाया है। बताया गया है कि अभी तक सीबीआई ने गवाहों की 6 लिस्ट जमा की हैं, लेकिन किसी में भी झाला का नाम नहीं है।

गौरतलब है कि 26 नवंबर, 2005 को मध्य प्रदेश के स्थानीय अपराधी सोहराबुद्दीन शेख को गुजरात एटीएस और राजस्थान पुलिस ने गांधीनगर में कथित तौर पर एनकाउंटर करके मार दिया था। एटीएस ने कहा था कि वह शहर में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने आया था। हालांकि, सीबीआई के मुताबिक सोहराबुद्दीन का 22 नवंबर को तेलंगाना सीमा के पास से पत्नी कौसर और सहायक तुलसीराम समेत अपहरण कर लिया गया था। झाला ने आरोप लगाया कि आईपीएस ऑफिसर डीजी बंजारा और राजुकमार पांडियान ने उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक देने की धमकी दी।

मिली जान से मारने की धमकी
झाला ने सीबीआई को लिखे खत में पूछताछ के लिए न बुलाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई स्पेशल सीबीआई कोर्ट में हो रही है, जिसकी अध्यक्षता जज एसजे शर्मा कर रहे हैं। झाला ने अपने बयान में कहा कि एटीएस ने 8 दिसंबर, 2005 को उन्हें उठाया और एक हफ्ते से ज्यादा हिरासत में रखा। इस दौरान चुदास्मा एटीएस ऑफिस में दो बार आए और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। झाला ने यह भी कहा कि दोनों दिन चुदास्मा टाटा क्वॉलिस से आए। इसी गाड़ी में सोहराबुद्दीन का अपहरण हुआ था।

चुदास्मा-सोहराबुद्दीम का रैकिट
सूत्रों के मुताबिक झाला ने सीबीआई को खत लिखने का फैसला तब किया जब मामले में कई गवाह पलट गए। मौजूदा ट्रायल में 176 में से 91 गवाह पलट चुके हैं। झाला ने अपने बयान में गुजरात के पॉप्युलर बिल्डर्स के भी चुदास्मा और सोहराबुद्दीन के रंगदारी रैकिट में फंसे होने की भी बात कही है। सीबीआई के मुताबिक चुदास्मा ने सोहराबुद्दीन को रंगदारी के लिए भेजा। चुदास्मा के कहने पर सोहराबुद्दीन ने 8 दिसंबर, 2004 को तुलसीराम और सिल्वेस्टर डैनियाल को पॉप्युलर बिल्डर्स के परिसर में गोलीबारी के लिए भेजा।

झाला ने बताया कि जब उन्हें फायरिंग के बारे में पता चला तो वह समझ गए कि यह चुदास्मा का काम है। झाला के बयान में यह भी कहा गया है कि चुदास्मा ने अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक यशपाल चुदास्मा के पास भी पैसे रखे।

Source: खेल

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