शिवराज के बाद अब केंद्रीय मंत्री के बदले स्वर, एट्रोसिटी एक्ट को लेकर दिया ये बयान

भोपाल
बीते दिनों एससी/एसटी कानून का विरोध कर रहे सवर्णों, सपाक्स समेत कई संगठनों को शांत कराने मुख्यमंत्री शिवराज ने बड़ा ऐलान किया था।मुख्यमंत्री ने कहा था कि एससी एसटी एक्ट में बिना जांच के  गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। प्रदेश में एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग नहीं होने देंगे और जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले एससी एसटी एक्ट को लेकर भाजपा बैकफूट पर आ गई है, पार्टी और नेताओं ने डैमेज कंट्रोल करना शुरू कर दिया है। सीएम शिवराज के बयान पर सुर में सुर मिलाते हुए अब केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत ने भी एससी-एसटी एक्ट को लेकर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने सीएम शिवराज के बयान का समर्थन करते हुए कहा है कि  ऐसे मामलों में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि चौहान के कहने एवं एक्ट के प्रावधानों में कोई अंतर नहीं है।

गेहलोत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने के पहले डीएसपी स्तर का अधिकारी जांच करेगा। इसके बाद ही रिपोर्ट दर्ज की जाएगी, अन्यथा नहीं।लेकिन हमने इसमे बदलाव किया है कि जिसके बाद यदि कोई व्यक्ति शिकायत लेकर आता है तो उसकी एफआईआर बिना जांच पड़ताल के ही तुरंत दर्ज कर ली जाए।शिकायत के बाद थाना प्रभारी, उप निरीक्षक अथवा एएसआई मामले की जांच करेगा, यदि प्रथम दृष्टया उसे लगता है कि मामले में दम है तो गिरफ्तारी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि एसएसपी अथवा अपाइंटिंग अथॉरिटी की अनुमति का जो सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान किया था उसे 'हमने ऐसा कर दिया कि गिरफ्तारी के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं होगी, मामले की जांच करने वाला अधिकारी खुद ही गिरफ्तारी कर लेगा। गेहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि यही बात मुख्यमंत्री चौहान ने कही है कि बिना जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी।

बता दें मध्य प्रदेश में अबकी बार 200 पार का नारा देने वाली बीजेपी के लिए एससी-एसटी एक्ट में संशोधन गले की फांस बन गया है। सवर्णों की नाराज़गी शिवराज के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। चुनावी साल में अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह डर सता रहा है कि कहीं एसएसी-एसटी एक्ट के विरोध में आवाज मुखर करने वाले सवर्णों की नाराजगी का उनकी सरकार और बीजेपी पर भारी ना पड़ जाए। ऐसे में सरकार लगातार सवर्णों को मनाने में जुटी हुई है। इसी साल एमपी में चुनाव भी होना है, ऐसे में शिवराज नहीं चाहते कि सवर्ण समाज उनके खिलाफ जाए।

Source: खेल

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