यूरोप का ये देश बदल देगा अपना नाम, हैरानीजनक है वजह

लंदन
विलियम शेक्सपियर का एक जुमला बड़ा प्रसिद्ध है कि  'नाम में क्या रखा है'? ये जुमला न जाने कितनी बार कहा और सुना गया  होगा  लेकिन,  सच तो यही है कि नाम में ही सब कुछ है इसीलिए शायद पूर्वी यूरोप का देश मैसेडोनिया अपना नाम बदलने की तैयारी में है। लगभग 21 लाख की आबादी वाले इस छोटे से देश को लगता है कि नाम बदलने से उसके लिए समृद्धि और सुरक्षा के नए रास्ते खुलेंगे। इसी मुद्दे पर रविवार को वहां जनमत संग्रह होने वाला है और सरकार चाहती है कि लोग मैसेडोनिया का नाम बदल कर नॉर्थ मैसेडोनिया करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दें। लेकिन सवाल यह है कि नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी? मैसेडोनिया के एक पड़ोसी को उसके नाम पर सख्त एतराज है यह पड़ोसी देश  है ग्रीस, जिसके एक इलाके का नाम भी मैसेडोनिया है। 

आज तक ग्रीस ने मैसेडोनिया को एक अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं दी है। उसे लगता है कि मैसेडोनिया नाम होने की वजह से उसका पड़ोसी देश ग्रीक इलाके पर अपना दावा जता सकता है। इसी वजह से ग्रीस ने आज तक मैसेडोनिया को ना तो पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो में शामिल होने दिया है और ना ही यूरोपीय संघ में। वैसे इस विवाद के बीज 2 हजार साल से भी पुराने अतीत में छिपे हैं। मैसेडोनिया नाम के ये दोनों इलाके रोमन साम्राज्य के मैसेडोनिया प्रांत के हिस्से थे। इसीलिए ग्रीस और मैसेडोनिया के बीच विश्व विजेता रोमन सम्राट सिकंदर की विरासत को लेकर भी झगड़ा रहा है। दोनों देश इस विरासत पर अपना हक जताते हैं। सिकंदर का जन्म मौजूदा ग्रीस के मैसेडोनिया इलाके में हुआ। लेकिन रोमन साम्राज्य का अहम हिस्सा होने के नाते मैसेडोनिया के लोगों के लिए आज भी यह बेहद भावुक मुद्दा है। 

नाटो और ईयू का हिस्सा बनने की राह में ग्रीस की तरफ से डाले जाने वाले अडंगों का मैसेडोनिया ने कुछ अलग ही अंदाज में जवाब दिया। उसने अपनी राजधानी स्कॉपिए में सिकंदर जैसे ग्रीक नायकों की कांसे और पत्थर की कई प्रतिमाएं खड़ी कर दीं। इससे शहर की सुंदरता में तो इजाफा हुआ, लेकिन पड़ोसी ग्रीस के साथ संबंधों में तनातनी बनी रही। दशकों तक एक दूसरे से झगड़ने और खरी खोटी सुनाने के बाद ग्रीस और मैसेडोनिया के प्रधानमंत्रियों के बीच एक समझौते पर सहमति बनी। इसके मुताबिक अगर मैसेडोनिया अपना नाम बदल कर नॉर्थ मैसेडोनिया रख ले तो ग्रीस नाटो और यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने की मैसेडोनिया की कोशिशों पर वीटो नहीं करेगा।

 प्रधानमंत्री जोरान जाएव की सरकार रविवार को जनमत संग्रह में लोगों से यही पूछ रही है कि क्या वे ग्रीस और मैसेडोनिया के बीच हुई डील को स्वीकार करते हुए यूरोपीय संघ और नाटो की सदस्यता के हक में हैं? दूसरी तरफ, इस डील के आलोचकों की कमी नहीं है। ग्रीस और मैसेडोनिया, दोनों ही देशों में आलोचकों को लगता है कि उनकी सरकार पड़ोसी देश की सरकार के सामने कुछ ज्यादा ही झुक रही है। ग्रीक आलोचक कहते हैं कि नाम भले ही बदल ले लेकिन मैसेडोनिया उनके इलाके पर अपना दावा इतनी आसानी से नहीं छोड़ेगा।  
 

Source: खेल

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