#MeToo: गलत ढंग से छूने पर 5 साल तक की जेल, ये हैं भारत में कानून

नई दिल्ली
हॉलीवुड के बाद अब #MeToo अभियान की बाढ़ भारत में भी पहुंच गई है। #MeToo ने कई दिग्गज हस्तियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। महिलाओं ने मनोरंजन, मीडिया जगत और राजनीतिक क्षेत्र में यौन शोषण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं। नाना पाटेकर-तनुश्री दत्ता के बीच शुरू हुए विवाद के चलते #MeToo अभियान ने भारत में रफ्तार पकड़ी है। इन सबके बीच एक बात जो महिलाओं के लिए जानना बहुत जरूरी है, वो यह कि अगर वे किसी तरह की हैरसमेंट का शिकार होती हैं तो इस स्थिति में किस तरह से कानूनी तौर पर मदद ले सकती हैं।
 भारत में कड़े कानून
किसी भी तरह का यौन उत्पीड़न या सेक्शुअल हैरसमेंट कानूनी तौर पर गलत है और इसके लिए भारत में कड़े कानून भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने विशाखा गाइडलाइंस 1997 में जारी की थी और इसके बाद 2013 में प्रीवेंशन आॅफ सेक्शुअल हैरसमेंट आॅफ विमेन एट वर्कप्लेस एक्ट लागू किया गया। इतना ही नहीं आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 भी सेक्शुअल हैरसमेंट को लेकर काफी सख्त कानून है। इन कानूनों के आधार पर सजा भी अलग-अलग है।
 सजा का विधान
आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 2013 के तहत अगर कोई किसी महिला को गलत ढंग से छूता या उसकी सहमति के बिना उसे टच भी करता है तो इस पर अपराधी को 1 से 5 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
अगर कोई महिला की बिना सहमति के उस पर नजर रखता है, उसकी तस्वीरें खींचता है तो यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) के तहत गलत है और ऐसा करने पर 1 से 7 साल तक की सजा के साथ जुर्माना है।
किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए गए शब्द या इशारे करना अपराधी कानून अधिनियम 2013 के तहत जुर्म है और इसमें अपराधी को 3 साल की जेल हो सकती है साथ ही जुर्माना भी भुगतना पड़ सकता है। 
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 के तहत भी सैक्शुअल हैरसमेंट की शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके तहत अपराधी को 5 साल तक की सजा हो सकती है।
 


Source: खेल

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