आखिर ड्यूक की गेंद में ऐसा क्या है खास, जो विराट कोहली का आ रही रास

 
नई दिल्ली

गुरुवार को टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने टेस्ट मैचों में गेंद के इस्तेमाल को लेकर नहीं बहस छेड़ दी। कोहली के मुताबिक, वह दुनिया के किसी भी हिस्से में ड्यूक गेंद से टेस्ट क्रिकेट खेलना पसंद करेंगे। इससे पहले टीम के स्टार ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन भी एसजी की तुलना में कूकाबूरा को बेहतर बता चुके हैं। बता दें अभी टेस्ट क्रिकेट में ड्यूक्स, कूकाबूरा और एसजी गेंदों का इस्तेमाल होता है। भारत हाथ से बनी एसजी गेंद का इस्तेमाल करता है। यहां जानते हैं तीनों गेंदों में क्या है अंतर.. 
 
– भारत में इस्तेमाल होने वाली एसजी गेंद को नाटकीय अंदाज में कोहली और अश्विन ने नकार दिया है। ये दोनों खिलाड़ी मानते हैं कि ऑस्ट्रेलिया में मशीन से बनी कूकाबूरा बॉल या फिर इंग्लैंड में हाथ से बनने वाली ड्यूक गेंद की क्वॉलिटी ज्यादा बेहतर है। 

 
-एसजी गेंद की सीम टेस्ट मैच की पारी के अंत तक स्पष्ट बनी रहती है। इससे स्पिनर्स को बॉल ग्रिप करने में मदद मिलती है और तेज गेंदबाजों को भी बॉल को उठी हुई सीम के साथ रिलीज करने में फायदा होता है। यह गेंद तब ज्यादा स्विंग करता है, जब इस गेंद की एक साइड की शाइन बरकरार रखी जाती है, तब यह ज्यादा स्विंग में मददगार होती है। इस गेंद से स्पिनर्स को ज्यादा ड्रिफ्ट और पेसरों को अच्छी रिवर्स स्विंग मिलती है। लेकिन कोहली और अश्विन मानते हैं कि अब इस गेंद की सीम लंबे समय तक उभरी हुई नहीं रहती। 

-कूकाबूरा गेंद की सीम जल्दी से फेड होती है। जब इस नई गेंद की सीम सही रहती है, तो यह स्विंग और हरकत करती है लेकिन गेंद पुरानी होने के साथ-साथ इसकी सीम पर असर पड़ता है और इस गेंद की स्विंग भी खत्म होती जाती है। इससे वे गेंदबाज जो उंगलियों की मदद से गेंद को स्पिन करते हैं, उन्हें बोलिंग में गेंद से खास मदद नहीं मिलती, इस कारण वह पिच से भी कोई खास लाभ नहीं ले पाते। हालांकि कूकाबूरा की गेंद से लेग स्पिनर और हिट-दडेक (पिच की सतह) वाले बोलर्स को अच्छी खासी मदद मिलती है। 

-कूकाबूरा की अपेक्षा में ड्यूकी की सीम ज्यादा बेहतर रहती है। इस गेंद की सीम 50 ओवर के खेल के बाद भी बनी रहती है। यह गेंद बहुत ज्यादा स्विंग करती है और सीम और स्विंग बोलिंग को रास आती है। इंग्लैंड में सीम और स्विंग बोलर इसीलिए कामयाब हो पाते हैं। 

कूकाबूरा की गेंद से टेस्ट क्रिकेट की अगर बात करें, तो ऑस्ट्रेलिया, न्यू जीलैंड, साउथ अफ्रीका, पाकिस्तान, श्री लंका और जिम्बाब्वे जैसे देश इसी गेंद से खेलते हैं। इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज में अगर टेस्ट मैच आयोजित हो रहे हैं, तो फिर यहां ड्यूक की बॉल इस्तेमाल होती है, जबकि SG की गेंद का इस्तेमाल केवल भारत में ही होता है। 
 


Source: राजनीति

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