सत्य की असत्य पर हुई जीत, भगवान राम ने रावण रूपी बुराई का किया अंत

जतारा
सत्य की असत्य पर और अच्छाई की बुराई पर विजय का पर्व दषहरा नगर में पारम्परिक रुप से मनाया गया । षुक्रवार को हिन्दू उत्सव समिति द्वारा विषाल चल समारोह का आयोजन किया गया । दषहरा चल समारोह दोपहर 4 बजे संतोषी माता मंदिर से प्रारम्भ हुआ । चल समारोह में आगे आगे घोडों पर सवार धर्म ध्वजा लिए हुए चल रहे थे । वहीं विषालकाय दषनन रावण का पुतला आकर्षण का केन्द्र रहा । इसके साथ ही भगवान नरसिंह भगवान की झाॅकी व वनवासी राम राजाराम की झाॅकी व गले में सर्पों की माला डाले हुए भगवान भोले शंकर की झाॅकी सभी का मन मोह रही थी ।

विकराल रूप में माॅ काली और भोले षंकर की झाॅकी सभी को अपनी ओर आकर्शित कर रही थी। चल समारोह में माॅ दुर्गा की झाॅकियाॅ भी आकर्षित तरीके से निकाली गयी। ढोल नगाडों की थाप पर भजनों पर भक्त जमकर थिरकते रहे। वहीं बजरंग आखाडा व बच्चा अखाडा द्वारा अपनी हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्षन चल समारोह का मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहा । दिल दिल घोडी, नोटंकी, कलाकरों द्वारा दी गयी प्रस्तुति से दर्षकों का मनोरंजन होता रहा व दषहरा चल समारोह मेन मार्कैट, बस स्टेण्ड, गंज मुहल्ला होते हुए आम घाट स्थित दषहरा मैदान पहुॅचा । जहाॅ वनवासी भगवान श्री राम ने अग्नि बाण से दषनन रावण का अंत किया । अंततः रावण का पुतला धू धू कर जलता रहा और रावण रुपी बुराई का अंत हो गया । उपस्थित सभी ने एक दूसरे को दषहरा की शुभकामनाये देते हुए राम राम कहीं ।

षुक्रवार को नौ दिन से चले आ रहे नव दुर्गा महोत्सव का देवी विसर्जन के साथ समाप्त हो गया है। नगर में सैकडों जगह विराजमान माॅ दर्गा की प्रतिमाओं को भक्तों ने माॅ को अंतिम विदाई दी। भक्तों ने ढोल नगाडों के साथ देवी माॅ की प्रतिमाओं की षोभायात्रा निकाल कर मदन सागर तालाब में विसर्जित किया गया।


Source: खेल

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