सरकारी बैंकों के कमजोर प्रदर्शन की संभावना

नई दिल्ली
पिछली कई तिमाहियों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद निवेशक अब यह मान रहे थे कि कर्ज के बोझ से दबे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के लिए बुरा समय बीत गया है लेकिन ऐसा लगता है कि अभी उन्हें कुछ और समय इंतजार करना होगा। चूक में कुछ संभावित नरमी के बावजूद इन बैंकों के सितंबर तिमाही (इस वित्त वर्ष की दूसरी) में भी अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने की संभावना है। 

प्रावधान संबंधी दबाव और कोष की ज्यादा लागत की वजह से सितंबर तिमाही के आंकड़ों पर दबाव रह सकता है। इस तरह से कुल आय एक साल पहले की तुलना में दबाव में रहने की आशंका है और कई बैंक नुकसान दर्ज कर सकते हैं। हालांकि कुछ बैंक तिमाही आधार पर सुधार दर्ज कर सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने अपने आय अनुमान में कहा, ‘सभी सरकारी बैंकों द्वारा कुल 300 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किए जाने की संभावना है। एक साल पहले सितंबर तिमाही के दौरान यह मुनाफा 2900 करोड़ रुपए था। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ऐसा एकमात्र सरकारी बैंक है जिसके कर बाद लाभ दर्ज करने की संभावना है।’

सरकारी बैंकों पर बॉन्ड बाजार का दबाव बरकरार रहेगा, हालांकि जून तिमाही की तुलना में यह दबाव कम रहेगा। फिर भी, कुछ एमटीएम नुकसान दर्ज किया जा सकता है। इसके लिए बैंकों को अपने बॉण्ड कर्ज का फिर से मूल्यांकन करने की जरूरत होगी। ये बैंक सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में प्रमुख निवेशक हैं और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के तहत उन्हें तिमाही आधार पर जी-सेक की बाजार वैल्यू में किसी भी तरह की गिरावट के लिए भरपाई या प्रावधान करने की जरूरत होगी। जी-सेक की वैल्यू बॉन्ड प्रतिफल से जुड़ी है। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल दूसरी तिमाही में 12 आधार अंक बढ़कर 8.02 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा आरबीआई की अनुमति से एमटीएम नुकसान को अक्टूबर-दिसंबर 2017 की अवधि से चार तिमाहियों तक आगे ले जाने वाले कुछ बैंकों को अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। 
 


Source: राजनीति

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